(6) वाल्ट डिजनी।।।।

दोस्तो अपने वाल्ट डिजनी का नाम तो सुना ही होगा। ये वो आदमी है जिन्होंने एक कार्टून चूहे(मिक्की माउस) को एक अंतरराष्ट्रीय, कई बिलियन डॉलर का बिज़नेस बना दिया। उन्होंने डिजनीलैंड जैसे सपने को देखने का जोखिम उठाया ऊपर आप जो फ़ोटो देख रहे हैं वो डिजनीलैंड की ही है जो दुनिया का पहला थीम पार्क बना जहाँ हर उम्र वाले के लिए कुछ न कुछ था। उनका सपना इतना बड़ा था कि उन्होंने कैलिफोर्निया में कई एकड़ जमीन खरीदी ओर कई साल लगाए उससे बनाने में। पर साल इतने लगे कि मृत्यु के बाद भी वहाँ काम चलता रहा।डिजनीलैंड के उद्धघाटन के वक़्त एक पत्रकार ने रॉय डिजनी(वाल्ट डिजनी के भतीजे) से कहा कि ये खेद की बात है कि आपके अंकल वाल्ट डिज़नी अपने जीते जी अपना सपना पूरा होते नही देख पाए। रॉय ने मुस्कुराकर पत्रकार से कहा, आप गलत है यही उनका सपना है उन्होंने हम सब से पहले अपने सपनो में पहले ही डिजनीलैंड का पूरा स्वरूप देख लिया था।

(5) CV रमन बॉयोग्राफी।।।।

जो काम आपके सामने है उसे पूरी हिम्मत और लगन से करे तो सफलता आपके पास जरूर आएगी।नीरज इंस्पिरेशन में आपका स्वागत है आज हम बात करने जा रहे है भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक cv रमन के बारे में जिन्होंने गुलाम भारत में जन्म लेने के बावजूद अपनी काबिलियत के दम पर भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में नाम कमाया उनके द्वारा दिया गया एक शोध रमन इफ़ेक्ट सबसे महत्वपूर्ण शोधों में से एक है इसके लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था तो चलिये इनके बारे में ओर जानने की कोशिश करते हैं cv रमन का जन्म 7 नवंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में हुआ था जो उस समय मद्रास प्रेसिडेंसी का हिस्सा था उनका पूरा नाम चंद्रशेखर वेंकटरमन था उनके पिता जी का नाम चंद्रशेखर अय्यर था और वो विज्ञान के लेक्चरर थे। जिन्होंने बचपन से ही उन्हें विज्ञान के बारे में बहुत कुछ बताया था cv रमन जी बचपन से ही बड़े जिज्ञासु स्वभाव के थे हमारे आस पास जो भी चीजे होती है वह कैसे होती है और क्यो होती है ये जानने की इच्छा हमेशा उनके मन मे रहती थी और यह जागरूकता बुढ़ापे में भी उनके मन मेंं उतनी ही थी जितनी कि बचपन मे थी उनके पिता उनके सवालों के जवाब देते थे और उन्हें ज्यादा से ज्यादा विज्ञान के बारे बताते ओर सिखाते थे उनके सबसे पहले गुरु उनके पिता ही थे जब वो कॉलेज गए तो उन्होंने कई तरह के शोध किये और बहुत रिसर्च भी की। मगर वहां मौजूद अंग्रेजों ने उन्हें आगे नही बढ़ने दिया। उन्हें इस बात का एहसास होने लगा था कि भारत के गुलाम होने की वजह से यहाँ पर किसी सामान्य इंडियन के द्वारा कोई रिसर्च करना या लोगो तक अपनी सोच को पहुचाना बहुत ही मुश्किल था फिर वो सरकारी नौकरी के लिए कोशिश करने लगे। फाइनेंसियल सिविल सर्विसेज के एग्जाम में उन्होंने टॉप कर लिया और सबसे कम उम्र के असिस्टेंट अकाउंटेंट जनरल बने उसके बाद उन्होंने लोकासुंदरी अमल नाम की लड़की से शादी कर ली उनके दो लड़के थे चंद्रशेखर ओर राधाकृष्णन । फिर उन्हें कोलकाता यूनिवर्सिटी से वाईस चांसलर की पोस्ट के लिए नौकरी का ऑफर आया अपनी वर्तमान नौकरी में कम तनख्वाह होने के बावजूद उन्होंने इस ऑफर को बड़ी खुशी से स्वीकार कर लिया। एक बार उन्होंने सोचा कि समुद्र का रंग नीला क्यो होता है इस पर उन्होंने शोध करना शुरू कर दिया और कई सालों प्रयास के बाद रमन इफ़ेक्ट दुनिया के सामने आया इसके लिए उन्हें 1930 में नोबेल प्राइज भी मिला हुआ है 1933 में इन्हें इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस बंगलुरू के डायरेक्टर पद पर नियुक्त किया गया ये पद पाने वाले वो पहले भारतीय थे इनसे पहले वह ब्रिटिश डायरेक्टर बनते आये थे रमन जी ने यहां एक शोध डिपार्टमेंट बनाया वह चाहते थे कि इंडिया में शोध का एक अच्छा माहौल बनाया जा सके पर उनके इस एक्शन से कई तरह के विद्रोह होने लगे जिनकी वजह से बाद में उन्होंने डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया फिर उन्होंने स्वतंत्र रूप से रिसर्च करने के लिए रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्थापना की । 1954 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया फिर अचानक अपनी लाइब्रेरी में काम करते समय वह बेहोश हो गए उनके दिल मे परेशानी आ गयी थी।उस समय तो उन्हें बचा लिया गया पर डॉक्टर ने कहा कि उनके पास गिनती के कुछ दिन बचे हैं उन्होंने हॉस्पिटल में रहने से इनकार कर दिया क्योंकि वो अपने आखिरी दिन अपने इंस्टीट्यूट में बिताना चाहते थे अपने काम को लेकर वह कितने समर्पित थे इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है अपनी मृत्यु से 1 दिन पहले उन्होंने अपनी इंस्टीट्यूट के मैनेजमेंट से मीटिंग ली और अपने काम के बारे में जानकारी दी ओर अगले दिन 21 नवंबर 1970 को 82 साल की उम्र में उनकी मृत्यु हो गयी 28 फरवरी 1928 को उन्होंने रमन इफ़ेक्ट डिस्कवर किया था इसी लिए इंडिया 28 फरवरी वाले दिन को साइंस डे के रूप में मनाता है।

(4) अल्बर्ट आइंस्टीन बॉयोग्राफी।।।।



जिस व्यक्ति ने कभी गलती नहीं की उस व्यक्ति ने कभी भी कुछ नया करने की कोशिश नहीं कि ऐसा कहना है दुनिया के सुप्रसिद्व वैज्ञानिक और भौतिक शास्त्री अल्बर्ट आइंस्टीन का ।जिन्होंने हमारे युग को इतना विकसित और डिजिटल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है वह अपने सापेक्षता के सिद्धांत और द्रव्यमान ऊर्जा समीकरण के लिए विख्यात है।इस फार्मूले का उपयोग मुख्यतः एटॉमिक बम बनाने में किया जाता है जिसके लिए उन्हें फिजिक्स के नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया दोस्तों आईये हम उनके बचपन मे चलकर उन्हें जानने की कोशिश करते है।
अल्बर्ट आइंस्टीन का जन्म 14 मार्च 1879 जर्मनी के ULM सिटी में हुआ था।उनके पिता का नाम हर्मन आइंस्टीन था जो कि एक इंजीनियर ओर सेल्समैन थे जब आइंस्टीन पैदा हुए थे उस समय उनका सिर उनके हिसाब से काफी बड़ा था शुरू से ही वह अन्य छोटे बच्चों से अलग थे वह छोटे बच्चों की तरह बिल्कुल भी शरारते नही किया करते और एक दम शान्त तरीके से रहते थे।
दोस्तों बच्चे पैदा होने के बाद अक्सर 1 या 2 साल में बोलना शुरू कर देते हैं लेकिन उन्होंने बोलने में 4 साल लगा दिए थे और करीब 9 साल तक अच्छे से नहीं बोल पाते थे जिससे उनके माता पिता को उनके भविष्य की चिंता होने लगी थी आइंस्टीन को अपनी उम्र के बच्चों के साथ खेलना बिल्कुल भी पसंद नही था।उन्होंने अपनी कही अलग ही दुनिया बना रखी थी उन्हें हमेशा रविवार का इंतजार रहता था क्योंकि उनके पापा उन्हें हर रविवार किसी शान्त जगह घूमाने ले जाते थे और वहा बैठ कर आइंस्टीन पेड पौधों ओर इस ब्रमांड के बारे में सोचते रहते थे उनके मन में हमेशा यह बात रहती थी की आखिर ये दुनिया चलती कैसे है अपनी शाररिक कमियों ओर ना बोल पाने की वजह से उन्होंने स्कूल जाना बहुत लेट शुरू किया। उन्हे स्कूल एक जेल की तरह लगता था।
उनका मानना था कि स्कूल एक ऐसी जगह है जहाँ कोई भी आजाद नही है इस सोच के पीछे एक कारण भी था वह अपने टीचर की बताई हुई बातों को आसानी से एक्सेप्ट नही करते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि टीचर के द्वारा पढ़ाई हुई चीजे अभी भी अधूरी है ओर इसी लिए वह उनसे बहुत अजीब अजीब से प्रसन्न किया करते थे जिसकी वजह से टीचर्स भी उनसे बहुत चिड़े हुए रहते थे और आइंस्टीन को उन्होंने मंद बुद्धि भी कहना शुरू कर दिया था बार बार मंद बुद्धि कहने के कारण आइंस्टीन को एहसास होने लगा था कि मेरी बुद्धि अभी विकसित नही हुई है ओर एक बार बात बात में उन्होंने अपनी एक टीचर से पूछा कि सर् में अपनी बुद्धि का विकास कैसे कर सकता हूँ टीचर ने एक लाइन में कहा अभ्यास ही सफलता का मूल मंत्र है आइंस्टीन ने टीचर की बातों को अपने मन मे बिठा लिया और एक दृढ़ निश्च्य किया कि अभ्यास के बल पर मै एक दिन सबसे आगे बढ़कर दिखाऊंगा उसके बाद से तो मानो उनकी जिन्दगी बदल गईं और अपने कठिन परिश्रम और अभ्यास की मदद से उन्होनें मैथ ओर फिजिक्स में महारथ हासिल कर ली जिसके बाद उन्होंने बहुत सारी खोज की जैसे सापेक्षता का सिद्धान्त, द्रव्यमान ऊर्जा,गति प्रकाश के उष्मीय गुण आदि।आज घर बैठे जो हमे इंटरनेट के द्वारा हमे जो जानकारियां प्राप्त हो रही है उन सभी अविष्कारों में भी अल्बर्ट आइंस्टीन का अहम योगदान है उन्होनें दिखा दिया कि एक मंद बुद्धि व्यक्ति भी मेहनत,लगन के बल पर इस संसार मे कुछ भी कर सकता है आइंस्टीन अपने दिमाग मे ही पूरी रिसर्च को सोच कर पूरा प्लान तैयार कर लेते थे।
जोकि उनकी लैबोरेटरी प्रयोग से ज्यादा सटीक होता था अल्बर्ट आइंस्टीन को इजराइल के राष्ट्रपति पद का प्रस्ताव भी दिया गया लेकिन उन्होंने इससे विनम्रता पूर्वक मना कर दिया अमेरिकी सरकार आइंस्टीन के टैलेंट से इतना डर गई थी कि उनके पीछे अपना एक जासूस लगा कर रखती थी ताकि उनके रिसर्च का कोई गलत प्रयोग ना हो जो देश के लिए हानिकारक साबित हो सकता था यह तक कि एक पैथोलोजिस्ट ने आइंस्टीन के शव प्रशिक्षण के दौरान उनका दिमाग चुरा लिया था ताकि वह उनके बुद्धिजीवी होने का पता लगा सके आइंस्टीन ने मानवता की भलाई ओर मनुष्य का जीवन सफल बनाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया और 18 अप्रैल 1955 को 76 उम्र में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा।

(3) एलियन की खोज।।।।

हेलो दोस्तो हमारे ग्रह से अलग दूसरे ग्रह पर रहने वाले लोगो को हम एलियन कहते हैं और उनके स्पेसशिप को हम U F O कहते हैं एलियन की तलाश में जुटी संस्था सर्च फ़ॉर एक्स्ट्रा टेरेस्ट्रियल इंटेलिजेंस बहुत सालो से अंतरिक्ष मे एलियन को ढूंढ रही हैं बताया जा रहा हैं कि हमारी पृथ्वी से रेडियो वेव भी छोड़ी गई हैं ताकि हमारी जो रेडियो वेव हैं वो एलियन तक पहुंच जाए और हम एलियंस का पता लगा सके पर कुछ साइंटिस्ट्स ने रेडियो वेव भेजने का विरोध किया हैं उन्होंने कहा हैं कि अगर रेडियो वेव भेजने से हमे एलियन मिल जाते हैं या उन्हें हमारे बारे में पता चलता हैं तो ये हमारे लिए खतरा साबित हो सकता हैं हम दूरबीन ओर सॅटॅलाइट की मदद से एलियन को काफी समय से ढूंढ रहे हैं पर हमें अभी तक कोई सुराख नही मिला हैं पर कुछ लोग U F O को देखने का दावा कर रहे हैं जोकि पिछले कुछ सालों से काफी चर्चा में हैं बताया जा रहा हैं कि अमेरिका के केक्सबर्ग के जंगलों के ऊपर एक अज्ञात वस्तु मंडराती हुई दिखाई दी और कुछ देर बाद आग लग गयी और एक भयंकर विस्फोट हुआ जिससे आस पास का पूरा क्षेत्र हिल गया और लोग इससे देखते ही रह गए

जब विस्फोट हुआ तभी इस क्षेत्र को अमेरिकी सरकार द्वारा घेर लिया गया यह पर किसी को भी जाने की अनुमति नही थी पर नासा ने इससे उल्का पिंड बताया हैं ऐसे ही रूस में भी 1989 में कई बार U F O देखे जाने की खबर मिली हैं रूस में 11 जून के दिन एक महिला ने 17 मिनट्स तक U F O देखने का दावा किया हैं और महिला के साथ 500 लोगो ने ये दावा किया हैं ओर सबसे ज्यादा रोमांचक किस्सा तो वो था जब 17 सितंबर 1989 को रूस के वोरोनल पार्क में बच्चे खेल रहे थे और पार्क में अचानक एक लाल रंग का अंडाकार शिप उतरा वहां बहुत सारे लोग इकठ्ठे हो गए और उसमे से दो एलियन बाहर आये वो करीब 12 ओर 14 फ़ीट लंबे थे एक तो रोबोट के जैसा था बच्चे उन्हें देख कर चीखने लगे और एक बच्चे पर तो उन्होंने लाइट की बीम छोड़ी ओर बच्चा लकवे जैसी स्थिति में पहुंच गया

उस जगह की रिसर्च करने पर उस जगह की मिट्टी में रेडिएशन के निशान मिले है और वहां फॉस्फोरस की मात्रा ज्यादा मिली है। और U F O कई टन का बताया जा रहा हैं ऐसे ही इटली में अलिटालिया विमान सेवा में एक यात्री ने U F O को बहुत करीब से देखने का दावा किया है हमने जो रेडियो वेव्स भेजी थी वो अब तक करोड़ो किलोमीटर तक जा चुकी हैं और एलियन तलाशने वाली संस्था S E T I कुछ रेडियो और दूरबीनो की मदद से एलियंस के संदेश को सुनने की कोशिशें कर रही हैं आने वाले समय मे कुछ देश एलियन का पता लगाने के लिए अंतरिक्ष यान के साथ दूरबीनों जैसी तकनीक का भी इस्तेमाल कर सकते है पर फिलहाल S E T I अपनी ये तलाश जारी रख रही हैं तो क्या हम एलियंस को तलाश कर पाएंगे स्टुअर्ट क्लार्क कहते है। की इससे न तो इनकार किया जा सकता हैं ना ही पक्के तौर पर कहा जा सकता है

(2) रोबोट।।।।

आज हम एक जबरदस्त टेक्नोलॉजी के बारे में जानने वाले हैं जिसका नाम रोबोट हैं रोबोट को हम बहुत सारी बॉलीवुड और हॉलीवुड मूवीज में देखते हैं रोबोट क्या हैं और कैसे काम करते हैं ऐसे बहुत सारे सवाल हमारे मन में आते हैं रोबोट एक तरह की मशीन हैं जो खास तोर पर कंप्यूटर के द्वारा डाले गए प्रोग्राम या निर्देशों के आधार पर काम करती हैं रोबोट बहुत मुश्किल कामो को भी बिल्कुल आसानी के साथ कर देते हैं और पूरी सटीकता के साथ करते हैं रोबोट मैकेनिकल सॉफ्टवेयर और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग के कॉम्बिनेशन से बने होते हैं और कुछ रोबोट को कण्ट्रोल करने के लिए एक्स्ट्रा कण्ट्रोल डिवाइस प्रयोग किया जाता हैं और बहुत सारे रोबोट में उनके अंदर ही कण्ट्रोल डिवाइस लगा होता हैं रोबोट को बनाते समय इनकी शेप और साइज पर इतना ध्यान नहीं दिया जाता ऐसा बिलकुल भी नहीं हैं की इंसानो के जैसे दिखने वाले ही रोबोट होते हैं रोबोट कैसी भी शेप और साइज के हो सकते हैं वो तो सइंटीस्टो को जैसा रोबोट से काम लेना होता हैं उन्हें वैसी ही शेप में बना देते हैं अगर इंसानो के जैसा दिखने वाला रोबोट बनाएंगे तो वो सिर्फ इंसानो के जैसे ही काम करेगा

रोबोट के कुछ पार्ट्स के नाम ;-

:-Structure body

:-sensor system

:-muscle system

:-power system

:-brain system

किसी भी रोबोट में मूवमेंट करने वाले फिजिकल स्ट्रक्चर होते हैं जिसमे की एक तरह की मोटर, सेंशर सिस्टम पावर देने के लिए सोर्स और एक कंप्यूटर ब्रेन सिस्टम होता हैं जो पूरी बॉडी को कण्ट्रोल करता हैं रोबोट अलग अलग दिशाओ में घूमने के लिए पिस्टन का प्रयोग करते हैं और उसके ब्रेन सिस्टम में प्रोग्राम बना कर डाला हुआ होता हैं उसी के अनुसार रोबोट पूरी बॉडी को संचालित करता हैं वो लिखे हुए प्रोग्रम्मो के आधार पर काम करता हैं जब हमे उससे कोई दूसरा काम लेना होता हैं तो हमे प्रोग्रम्मो को दुबारा लिख कर डालना होगा

(1) ब्लैक होल||||

ब्लैक होल हमारे स्पेस में एक होल होता हैं जो उसके इवेंट होराइजन में आने वाली सभी चीजों को खींच कर अपने अंदर निगल लेता हैं और उसके अंदर से एक भी चीज बहार निकल कर नहीं आती ब्लैक होल अपने अंदर से लाइट को भी पास नहीं होने देता ये अपने अंदर लाइट को अवसोसित कर लेते हैं और कुछ भी परावर्तित नहीं करते इन्हे देखना बड़ा मुश्किल होता हैं अंतरिक्ष में जब कोई विस्फोट होता अक्सर साइंटिस्ट इन्हे उन विस्फोट से पैदा होने वाली लाइट मैं देखने की कोसिस करते हैं या फिर इनके आस पास के गुरुत्वाकर्षण बल से इनका पता लगता हैं हमारी गैलेक्सी के बीच में भी एक सुपर मैसिव ब्लैक होल हैं जिसके चारो और हमारा सोर मंडल और बाकि ग्रह घूमते रहते हैं कुछ छोटे ब्लैक होल भी होते हैं कुछ बड़े ब्लैक होल भी होते हैं जब हमारे यूनिवर्स की उत्पति हुई थी तभी ब्लैक होल का जन्म हुआ था जो बड़े ब्लैक होल होते हैं उनका द्रव्यमान तो सूर्य के द्रव्यमान से करोडो गुना बड़ा हो सकता हैं 1915 ईस्वी में साइंटिस्ट अल्बर्ट आइंस्टीन ने थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी दी वो ये पहले ही सिद्ध कर चुके हैं की गुरुत्वाकर्षण बल प्रकाश की गति पर वास्तव में प्रभाव डालता हैं 1974 ईस्वी में स्टीफन हौकिंग ने दिखाया की ब्लैक होल पूरी तरह काले नहीं होते बल्कि ये थोड़ी मात्रा में तापीय विकिरण भी निकलते हैं अब तक सइंटीस्टो द्वारा ये स्वीकार किया गया है की हर एक गैलेक्सी के केंद्र में एक सुपर मैसिव ब्लैक होल होता हैं

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