(20) ब्रम्हांड (Universe) ||||

हेलो दोस्तों आज हम जानने वाले है ब्रमांड के बारे में हमारा ब्रमांड बहुत ही बड़ा है शायद इतना बड़ा की हम उसकी कल्पना भी नहीं कर सकते फिर सदियों से हम इंसानो ने इस अनंत ब्रमांड को सजने की और उसे समझने की कोशिश कर रहे है झा तक हम इंसानो ने जाना है और जितने रिसर्च हुए है उनसे यह मालूम होता है कि ब्रमांड दो प्रकार के होते है एक तो दृस्य ब्रमांड और एक अदृस्य ब्रमांड ; हमे तारे,हमारी गैलेक्सी ,पृथ्वी सूर्य चंद्र हमे जो कुछ भी दिखता है वो है दृस्य ब्रमांड और जो हमारे ब्रमांड से बहार की दुनिआ है जो हमे नहीं दिखती वो है अदृस्य ब्रमांड आईये हम इसे और समझते है वैज्ञानिक कहते है की जब हमारा ब्रमांड बना था तब गैलेक्सी सूर्य चंद्र तारे प्रकाश की गति यह तक की समय भी नहीं था लेकिन हम जिसे ब्रमांड मानते है उससे पहले भी जरूर कुछ होगा जो आज हम देख रहे है एक थ्योरी के अनुसार ब्रमांड में बिंग बैंग ब्लास्ट लगभग साढ़े 13 अरब वर्ष पहले हुआ था तभी हमारी पृथ्वी और सौर मंडल का भी जन्म हुआ था बिग बैंग ब्लास्ट के बाद सब चीजे ब्रमांड में चारो तरफ फैलने लगी प्रकाश की गति ब्रमांड में सबसे तेज मानी जाती है प्रकाश जितनी दुरी एक साल में तय करता है उसे हम एक प्रकाश वर्ष कहते है

प्रकाश की गति 1 सेकंड में लगभग 300000 किलोमीटर की दुरी तय करती है तो कोई भी चीज इससे ज्यादा तेजी से नहीं फैली होगी हमारे ब्रमांड की उत्पति साढ़े 13 अरब साल पहले ही हुई थी इसलिए सारी वस्तुएँ अब तक साढ़े 13 अरब वर्ष के दायरे में ही फैली है उससे आगे नहीं गयी होगी खुद प्रकाश ही सिर्फ साढ़े 13 अरब वर्ष तक ही मौजूद है इससे आगे क्या है किसी को कुछ नहीं पता उसे ही हम अदृस्य ब्रमांड कहते है वहा हम आज तक नहीं देख पाए जहां प्रकाश है ही नहीं है वह हम देख कैसे सकते है हमारे शक्तिशाली टेलिस्कोप की मदद से बहुत सारे अध्यन किये वैज्ञानिको ने बहुत दूर की रोशनी का भी अध्ययन किया है गैलेक्सी , प्रकाश यहाँ तक की ब्लैक होल का भी अध्ययन कर चुके है पर सब साढ़े 13 अरब वर्ष फैले ब्रमांड के अंदर ही था उसके बहार क्या है वो सब हमारी कल्पना से परे है पर वहा हो सकता है अनंत गहराई हो या फिर हमारे ब्रमांड से अलग कोई और ब्रमांड हो झा कोई दूसरी दुनिया रहती हो पर शायद हम उसकी कल्पना भी नहीं कर सकते हम इंसानो की सोच हमारे ब्रमांड से आगे ख़तम हो जाती है हम सिर्फ अनुमान लगा सकते है हमे हमारे ब्रमांड से बहार का तो नहीं पता पर हमने हमारे ब्रमांड में बहुत सारी खोजे और अध्यन किये है यह कोई छोटी बात नहीं है हमने कई सारे खगोलीय पिंडो को एक्सप्लेन किया और हम ब्रमांड की अनंत गहराईयो को जान पाए हमारी पृथ्वी हमारे सौर मंडल का ही एक भाग है लेकिन हमारा सौर मंडल हमारी गैलेक्सी के एक बिंदु के सामान भी नहीं है और हमारी इतनी बड़ी गैलेक्सी भी हमारे ब्रमांड की चौड़ाई के सामने कुछ भी नहीं है इतना बड़ा है ब्रमांड।

(19) लकड़हारे की कहानी||||

एक बार एक मजबूत लकड़हारे ने एक लकड़ी के व्यापारी से काम माँगा और उसे काम मिल गया पैसे अच्छे मिल रहे थे और काम भी अच्छा था इसलिए लकड़हारा भी मन लगा कर काम करना चाहता था उसके मालिक ने उसे एक कुल्हाड़ी दी और उसे उसके काम करने की जगह बताई ;पहले दिन लकड़हारा 18 पेड़ काट कर लाया ;मुबारक हो मालिक ने कहा अब उस तरफ जाओ मालिक की बातो से प्रोत्साहित होकर लकड़हारे ने अगले दिन और कोशिश की मगर 15 पेड ही लाया पाया धीरे धीरे वह कम पेड़ लाने लगा

उससे लगने लगा शायद मै अपनी ताक़त खो रहा हु वह मालिक के पास गया और माफ़ी मांगी और कहा की वह समझ नहीं पा रहा है क्या हो रहा है मालिक ने पूछा ; तुमने आखरी बार अपनी कुल्हाड़ी कब तेज की थी तेज मुझे तेज करने का समय ही नहीं था मै तो पेड़ काटने में व्यस्त था

सबक ;

हमारी जिंदगी भी ऐसी ही है कभी कभी हम इतना व्यस्त हो जाते है की कुल्हाड़ी तेज करने का समय ही नहीं निकाल पाते आज के वक़्त में व्यस्त सभी है मगर खुश बहुत कम; ऐसा क्यों है क्या इसलिए क्योकि हम तेज रहना भूल चुके है काम और परिश्रम करना अच्छी बात है मगर इसका मतलब यह नहीं है की हम जिंदगी की अहम् चीजों को भूल जाये जैसे हमारी निजी जिंदगी ,भगवान् के साथ बिताने का समय ,परिवार के साथ समय , पढ़ने का समय आदि | हम सबको आराम के लिए वक़्त चाहिए , सोचने , जप करने ,सिखने और बढ़ने के लिए वक़्त चाहिए | अगर हम कुल्हाड़ी तेज करने का समय नहीं देंगे , तो हम कमजोर पड़ जायेंगे और अपना जोश खो देंगे |

(18) अपोलो 13 मिशन ||||

चाँद पर अपोलो 13 मिशन अंतरिक्ष की गहराई में था और प्लान के अनुसार चल रहा था जब एक ऑक्सीजन टैंक फट जिसकी वजह से कमांड मॉडुल की बिजली चली गयी अचानक ऐसा लगा की शायद उन तीन लोगो की टीम धरती से 100000 मिल दूर अंतरिक्ष में खो जाएगी जहा कोई उन्हें बचाने भी नहीं आ पायेगा पहले विस्फोट के तुरंत बाद हालात और खराब हो गए जब एक एक करके सारे सिस्टम बंद पड़ने लग गए हूस्टन में मिशन कण्ट्रोल पर बैठे सभी वैज्ञानिक स्तब्ध रह गए कण्ट्रोल सेंटर में घबराहट की लहर दौड़ गयी जैसे जैसे एक एक कर के उपकरण काम करना बंद करते गए फ्लाइट डायरेक्टर जिन क्रांतंज ने किसी तरह टीम को एक साथ जोड़ कर रखा उन्होंने एक वाक्य से घबराये विज्ञानिको और बाकि के हैरान दल को शांत किया ; विमान में ऐसा क्या है जो ठीक है ; इस सवाल ने सबका ध्यान एक बार क्या काम कर रहा है पर लगाया बजाए यह सोचने के कि क्या क्या खराब हो चूका है इससे पुरे दल का आत्मबल ; सब खत्म हो गया से ; आओ मिल कर सोचे ; और कुछ प्लान बनाये ताकि मिशन को बचाया जा सके में लग गया |

मतलब यह सवाल ; विमान में ऐसा क्या है जो ठीक है ; मिशन का सकारत्मक विचार बन सकता था उनके इस सवाल की ताक़त यह थी कि इससे सब लोग जो अपोलो 13 से जुड़े थे परेशानियो के हल का हिस्सा बने ; ना की परेशानी का !

(17) TIME TRAVEL (समय यात्रा )||||

हेलो दोस्तों टाइम ट्रेवल के बारे में तो अपने सुना ही होगा जिसे हम हिंदी में समय यात्रा भी कहते है ये सुनने में तो बड़ा अच्छा लगता है लेकिन इसके पीछे का लॉजिक दिमाग को चकरा देता है हम सभी चाहते है की हम समय में पीछे जाकर अपने द्वारा की गई गलतियों को सुधार सके और अपने भविष्य में भी समय यात्रा करके अपने आने वाले भविष्य को जान सके पर आपको क्या लगता है की time travel संभव है अगर वैज्ञानिकों की नज़र से देखा जाये तो समय यात्रा संभव है हम अभी भी समय यात्रा कर रहे है हम सभी अभी भूतकाल से गुजरकर वर्तमान से होते हुए लगातार भविष्य की और बढ़ रहे है इसी को हम समय यात्रा कहते है हमारी समय में यात्रा की दर 1 hour \ hour की दर से है यानि हमे भविष्य में एक घंटा आगे जाने के लिए एक घंटे का ही समय लगेगा पर क्या समय यात्रा की स्पीड को इसे ज्यादा किया जा सकता है यानि हम छोटे से अंतराल में ही हम हजारो साल आगे जा भविष्य में जा सकते है हां बिलकुल जा सकते है वैसे तो समय यात्रा कई थेओरीयो के द्वारा संभव है लेकिन हम सिर्फ एक थ्योरी के बारे में बात करेंगे अल्बर्ट आइंस्टीन की थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी के बारे में | अल्बर्ट आइंस्टीन में सापेक्ष्ता का सिध्दांत प्रकाशित किया था उसी के आधार पर टाइम ट्रेवल की कल्पना की जाने लगी अल्बर्ट आइंस्टीन से पहले आइजैक न्यूटन की थ्योरी कहती थी की टाइम हर जगह समान है फिर चाहे वो स्पेस हो या कोई प्लेनेट आज जो टाइम धरती पर है वही टाइम सब जगह है पर अल्बर्ट आइंस्टीन ने इस थ्योरी को गलत बताया है उन्होंने कहा है की टाइम अलग अलग जगहों पर अलग अलग है यानि टाइम स्पेस में अलग होता है और प्लेनेट पर अलग| कही टाइम स्लो होता है तो कही टाइम फ़ास्ट| टाइम एक नदी की तरह है जिसमे पानी कही धीमी रफ़्तार से चलता है तो कही तेज रफ़्तार से| अल्बर्ट आइंस्टीन की स्पेस टाइम की equation से ही टाइम ट्रेवल संभव है इस equation के अनुसार अगर कोई वस्तु जितनी तेज चलेगी उसके लिए टाइम उतना ही धीमा हो जायेगा जैसे की आप अगर किसी फास्ट ट्रेन या फिर हवाई जहाज में सफर कर रहे है और जब आप यात्रा के बाद हवाई जहाज से बहार निकलेंगे तो आप अपने टाइम से थोड़ा आगे होंगे स्पीड कम होने की वजह से आप केवल 1 सेकंड के करोडवे हिस्से के बराबर आगे होंगे | अगर आपका हवाई जहाज लाइट की स्पीड से चलने लगे तो जहाज में बैठे यात्रियों के लिए टाइम स्लो जायेगा और उन्हें बहार की दुनिया तेजी से चलती दिखाई देगी और जहाज के कुछ पल भी कई महीनो के बराबर होंगे हलाकि जहाज में बैठे लोगो को तो अंदर का समय सामान्य महसूस होगा लेकिन बहार की दुनिया के कम्पेरिज़न मे जहाज के अंदर का टाइम बहुत स्लो हो चूका होगा माना की आपका हवाई जहाज अगर एक हफ्ते में रुके तो आप लगभग धरती के 70 साल फ्यूचर में जा चुके होंगे आपके बच्चे आपके सामने बूढ़े हो चुके होंगे| आपका सिर्फ एक हफ्ता लगा और उनके 70 साल ये है टाइम ट्रेवल | पर टाइम ट्रेवल में सिर्फ हम फ्यूचर में ही जा सकते है पास्ट में नहीं जा सकते पर सवाल ये आता है की क्या हम कोई ऐसा जहाज या ट्रेन बना सकते है जो लाइट की स्पीड से ट्रेवल कर सके शायद आज के टाइम में हमे ये इम्पॉसिबल लगे पर आने वाले टाइम में ऐसा हो सकता है पर थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी के अनुसार अगर किसी वास्तु की स्पीड बढ़ जाएगी तो उसका मास्स यानि द्रव्यमान भी बढ़ता है अगर हमे कोई लाइट की स्पीड से चलने वाली वास्तु बनानी है तो हमे बहुत सारी एनर्जी की जरुरत पड़ेगी और हम ये कर सकते है

(16) नयी शुरुआत ||||

महान अमरीकी वैज्ञानिक थॉमस अल्वा एडिशन इस बात के परिचायक है की क्या हो सकता है अगर विपरीत परिस्तिथि में भी हम सकारात्मक पहलुओं पर गौर करे एडिशन 67 वर्ष के थे तब देर रात लगी एक आग में इनकी कंपनी जल कर खाक हो गयी और इनकी जीवन भर की महेनत आग के धुए में उड़ गई हालत तब और भी बदतर हो गए जब एहसास हुआ की कंपनी का इन्सोरैंस केवल 2,38,000 रुपए का था जबकि नुकसान 2 करोड़ रुपए का था अगले दिन एडिशन अपनी जली हुई जमीन का निरिक्षण कर रहे थे दोस्त और परिवारवाले बूढ़े एडिशन के आस पास थे और उन्हें सहनुभूति दे रहे थे आडिशन ने सभी को अपने पास बुलाया और उनसे कहा दोस्तों ये एक बहुत बड़ा नुकसान है जली हुई सीमेंट की बिल्डिंग की तरफ इशारा कर के बोले देखो हमारी सारी गलतिया जल चुकी है शुक्र है भगवान का|कि अब हम एक नयी शुरआत कर सकते है जरा सोचिये अगर एडिशन इस परिस्तिथि में सकारात्मक की जगह एक नकारात्मक नजरिया रखते तो वो इस आगजनी की घटना को सब छोड़ देने का बहाना बना सकते थे और फिर दुनिया उनके कुछ महान अविष्कारों से अनजानी रह जाती |

(15) उन्हें याद रखे जिन्होंने आपका साथ दिया है ||||

उन दिनों की बात है जब एक आइसक्रीम सन्डे भी अब से बहुत कम में आ जाती थी एक दस साल का लड़का एक होटल की कॉफ़ी शॉप में गया और एक टेबल पर जा कर बैठ गया एक महिला वेटर ने उसके आगे पानी का गिलास लाकर रख दिया एक आइसक्रीम सन्डे कितने की है उसने पूछा ! 50 रुपए की महिला ने जवाब दिया बच्चे ने अपनी जेब से हाथ निकाला और पैसे गिनने लगा अच्छा एक सादी आइसक्रीम कितने की आएगी उसने पूछा अब तक पर लोग भी होटल में आ चुके थे और खाली टेबल का इंतज़ार कर रहे थे और महिला वेटर भी अपना संयम खो रही थी रुपए 35 की महिला वेटर ने रूखी आवाज में कहा बच्चे ने फिर से अपने सिक्के गिने और कहा मै एक सादी आइसक्रीम लूंगा महिला ने आइसक्रीम लाकर रखी और साथ ही बिल रख कर वहा से चली गयी लड़के ने आइसक्रीम खायी पैसे दिए और चला गया जब महिला टेबल पोछने वापस आयी तो उसकी आँखों से आंसू आ गए वहा खाली प्लेट के पास 15 रुपए रखे थे वो लड़का आइसक्रीम सन्डे खा सकता था मगर उसने केवल इसलिए नहीं खायी ताकि वो महिला के लिए टिप छोड़ सके |

(14) हेनरी फोर्ड बायोग्राफी ||||

जब सब कुछ आपके खिलाफ जा रहा है तो याद रखिये हवाई जहाज भी कभी कभी हवा के विरुद्ध उड़ान भरता है ऐसा कहना है हेनरी फोर्ड का जिन्हे आधुनिक कारो का जनक भी कहा जाता है इन्होने दुनिआ भर में कार को इतना सस्ता बना दिया जिसे एक आम आदमी भी बहुत ही आसानी से खरीद सकता था और उसका लाभ उठा सकता था हेनरी फोर्ड का जन्म 30 अप्रैल 1863 को अमेरिका के ग्रीनफ़ील्ड टाउनशिप में हुआ था वो काफी गरीब घर में पैदा हुए थे उनके पिता का नाम विलियम फोर्ड था वो एक बहुत ही साधारण से किसान थे बचपन में हेनरी फोर्ड को प्लास्टिक के खिलोनो की बजाय उन्हें लोहे के खिलोनो से खेलना पसंद था 5 वर्ष की उम्र में हेनरी का एडमिशन गांव के पास के ही एक स्कूल में करवाया था जहा उन्होंने अपनी शुरू की पढ़ाई की और पैसे न होने की वजह से वो आगे की पढ़ाई नहीं कर सके इसलिए उनके पिता चाहते थे की हेनरी एक अच्छा किसान बने लेकिन हेनरी को खेतो में काम करना बिलकुल भी पसंद नहीं था वो बिना घोड़ो के चलने वाली गाडी बनाना चाहते थे और उसके लिए दिन रात जाग कर एक्सपेरिमेंट किया करते थे उस टाइम पर गाडी खरीदने के लिए अमीर लोगो को भी बहुत सोचना पड़ता था और अगर बात करे आम आदमी की तो वह तो मानो उनके लिए एक सपना था उन्हें गाडी के एक्सपेरिमेंट के लिए पैसो की जरुरत थी इसलिए वो 16 साल की उम्र में घर छोड़ कर चले गए और एक स्टीम इंजन बनाने वाली कंपनी में काम करने लगे उन्हें इस काम में बहुत मजा आया क्योकि यह उनके विचारो से सम्बंधित था और वह इस कंपनी में काम करते करते सीनियर इंजीनियर बन गए और उन्हें अच्छी सैलेरी भी मिलने लगी लेकिन उनकी पूरी सैलेरी कार के एक्सपेरिमेंट में ख़तम हो जाती थी इसलिए उन्हें और पैसो के लिए पावर टाइम जॉब करनी पड़ी वह एक आदमी से दोगुना काम किया करते थे उन्होंने बहुत सारे एक्सपेरिमेंट के बाद 1896 में अपनी पहली कार बनायीं जिस टाइम कार की इंजन स्टार्ट हुई उस समय रात के करीब तीन बज रहे थे और बारिश भी खूब हो रही थी लेकिन उनका एक्ससिटेमेंट इतना ज्यादा था उन्होंने कार को बहार निकाला और उसी समय चलाने लगे लोग गाडी की आवाज सुन कर घर से बहार आ गए और उसी कार को देख कर चौंक गए उसके बाद उन्होंने हेनरी की सफलता को देख कर उनक मनोबल भी बढ़ाया कुछ दिनों के बाद हेनरी ने वह गाडी बेच दी और उससे मिलने वाले पैसे और कुछ पैसे और मिलाकर उन्होंने 1899 में एक कंपनी खोली ऑटो मोबाइल की पर उससे किसी कारण इसे बंद करना पड़ा और उन्होंने हार न मानते हुए 30 नवम्बर 1901 में अपने कुछ आमिर दोस्तों के साथ मिलकर कंपनी शुरू की जिसका नाम हेनरी फोर्ड था लेकिन दोस्ती में मतभेद होने के कारण उन्हें यह कंपनी भी बंद करनी पड़ी क्योकि उनके दोस्त चाहते थे की कार को और महंगा बेचा जाये और केवल आमिर लोगो को ही टारगेट किया जाये पर हेनरी ऐसा नहीं चाहते थे दोनों के विचार न मिलने के कारण कंपनी को बंद करना पड़ा उसके बाद उन्होंने पुरानी सभी बातो से सिख लेते हुए हेनरी ने 1903 में एक और कंपनी खोली जिसका नाम फोर्ड था और उन्होंने अपनी कंपनी को दुनिआ के सामने लाने के लिए उन्होंने अपनी एक कार को रेसिंग ट्रैक पर उतारा जिसका मॉडल नंबर 999 था उस कार ने तो मानो धूम ही मचा दी थी और वह कार उस रेस में फर्स्ट आयी जिसके कारण लोग हेनरी और उनकी कंपनी को जानने लगे और उसके बाद तो मानो उनके पास पैसे की बारिश सी होने लगी और देखते ही देखते फोर्ड ने हजारो कारे बेच दी उनकी सफलता का एक राज और भी था उनका हर कारीगर किसी एक काम में परफेक्ट होता था और केवल व्ही काम करता था जिसमे उसने महारथ हांसिल की हो कारो से हमारी लाइफ बदलने के बाद आखिरकार 7 अप्रैल 1947 को हेनरी फोर्ड ने इस दुनिआ को अलविदा कह दिया हेनरी फोर्ड का कहना था की बाधाएँ वह डरावनी चीज है जिन्हे देख कर हम अपने लक्ष्य से नजरे हटा लेते है धन्यवाद्

(13) आइज़ैक न्यूटन बायोग्राफी ||||

कोई भी खोज बड़ी सोच के बिना नहीं की जा सकती ऐसा कहना था दुनिआ को गुरुत्वाकर्षण का सिध्दांत देने वाले महान वैज्ञानिक सर आइज़ैक न्यूटन का जिन्होंने अपनी सोच के दम पर इस विश्व को ऐसे वैज्ञानिक सिध्दांत दिए जिनके बिना हम विज्ञानं के बारे में सोच भी नहीं सकते है न्यूटन के बारे में बताने से पहले मै आपको उनके कुछ सिद्दांतो के बारे में बता देता हु उन्होंने न्यूटन लॉ ऑफ़ ग्रेविटी यानि गुरुत्वाकर्षण बल की खोज की थी उन्होंने बताया था की गुरुत्वाकर्षण नाम की शक्ति है जो हर चीज को अपनी तरफ खींचती है और इसी बल की वजह से चन्द्रमा पृथ्वी का चक्कर लगाता है और पृथ्वी सूर्य का इसके अलावा न्यूटन की गति के तीन नियम यानि लॉ ऑफ़ मोशन फिजिक्स में सबसे ज्यादा प्रयोग किये जाते है इन नियमो को एक साइकिल से लेकर हवाई जहाज बनाने तक प्रयोग किया जाता है और भी बहुत सारी खोज उन्होंने की चलिए आगे उनके जीवन के बारे में जानेंगे सर आइज़ैक न्यूटन का जन्म 25 दिसंबर 1642 में एक बहुत ही गरीब परिवार में हुआ था उन्हें बचपन में उनके पिता का प्यार नहीं मिल सका क्योकि उनके पिता की मृत्यु उनके इस दुनिआ में आने से करीब तीन महीने पहले हो गयी थी न्यूटन जन्म से ही बहुत ही कमजोर पैदा हुए थे और उन्हें बचा पाना लगभग नामुनकिन सा था लेकिन ऊपर वाले ने न्यूटन को महान कार्यो के लिए जीवित रखा और बहुत ही मुश्किल से उनकी जान बच पायी उनका नाम आइज़ैक न्यूटन उनके स्वर्गवासी पिता जी के नाम पर रखा गया था जब न्यूटन तीन साल के थे तब उनकी माँ ने दोबारा शादी कर ली लेकिन उनके सौतेले पिता को वह बिलकुल भी पसंद नहीं थे इसलिए उनकी माँ ने उन्हें दादा दादी के पास छोड़ दिया और वह अपने दूसरे पति के साथ रहने लगी शुरुवाती दिनों में न्यूटन ठीक से बोल भी नहीं पाते थे और साथ ही वह बड़े जिद्दी और गुस्सैल सवभाव के थे इलसिए उनके कोई दोस्त नहीं था और लोग उन्हें पागल भी बोलते थे वह शुरू से ही चाँद तारो के बारे में सोचते रहते थे और अपने दादा दादी से उनसे रिलेटेड प्रश्न किया करते थे लेकिन उनके दादा दादी उनके सवालो के जवाब ठीक ढंग से नहीं दे पाते थे क्योकि उस समय तक विज्ञानं में बहुत काम खोजे हुई थी 12 साल की उम्र में उन्होंने स्कूल जाना शुरू किया और उनकी शुरू की पढ़ाई उनके स्कूली ग्रंथो में हुई वह पड़ने में बिलकुल भी अच्छे नहीं हुआ करते थे और उनके पढ़ाई में कमजोर होने की वजह से स्कूल में बच्चे उनके काफी मजाक उड़ाते थे इस बात को लेकर हर दिन उनका क्लासमेट्स के साथ झगड़ा होता रहता था यहां तक की उनके झगडे की वजह से उन्हें स्कूल से भी निकाल दिया गया इसी बीच उनके दूसरे पिता की भी मृत्यु हो गयी और न्यूटन फिर से अपनी माँ के पास आ गए अब उनके घर में इनकम का कोई भी सोर्स नहीं था और घर का खर्च चलाना बहुत मुश्किल हो रहा था इसलिए न्यूटन की माँ चाहती थी की न्यूटन अब खेती कर ले और घर संभाले पर न्यूटन का मन खेती में बिलकुल भी नहीं लगता था इसलिए स्कूल के प्रिंसिपल से बात करके न्यूटन की माँ ने उन्हें फिर से स्कूल भेजना शुरू कर दिया लेकिन इस बार न्यूटन ने उसी स्टूडेंट से बदला लेने की सोच ली जिसकी वजह से वह स्कूल से निकाले गए थे और पूरी सिद्दत के साथ पढ़ाई करने लगे और जल्द ही स्कूल में टॉप कर लिया उसके बाद 1661 में अपने एक अंकल के माद्यम से उन्हें ट्रिनिटी कॉलेज में एडमिशन मिल गया और वह अपने कॉलेज के खर्चे चलाने और कॉलेज की फीस भरने के लिए कॉलेज के अमीर स्टूडेंट के वहा काम करते थे 1664 में उन्हें अपने कॉलेज से स्कॉलरशिप भी मिली जिसकी वजह से वह अपनी पढ़ाई और रिसर्च पर ज्यादा ध्यान दे सकते थे और फिर कॉलेज में ही उन्होंने 1665 में मैथमैटिकल लॉ की खोज की 1665 में उन्होंने B A की भी पढ़ाई पूरी कर ली और M A में एडमिशन लेने की सोची ;लेकिन एडमिशन के समय ही अचानक लन्दन में प्लेग की बीमारी फैल गयी जिससे शहर को पूरी तरह से बंद कर दिया गया इसलिए वह अपनी माँ के पास वापस आ गए और घर पर ही अगले दो सालो तक लॉ ऑफ़ मोशन और लॉ ऑफ़ ग्रेविटी के अपने सिद्दांतो पर काम करना शुरू कर दिया देखते देखते अगले कुछ सालो की कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने सफलता पा ली और दुनिआ को दिखा दिया की जिद्दी और पागल गुस्सैल लड़का अगर चाहे तो कुछ भी कर सकता है अपने सिद्दांतो से दुनिआ बदलने के बाद 1727 में लन्दन शहर में ही उनकी मृत्यु हो गयी आज सर आइज़ैक न्यूटन के सिद्दांतो की वजह से ही कुछ चीजे संभव हो पायी है और ये सिध्दांत विज्ञानं के लिए काफी मह्त्वपूर्ण साबित हुए दोस्तों इंसान अपने विचारो से ही महानं होता है वह जैसा सोचता है वैसा ही बन जाता है इसलिए अपनी सोच को हमेशा पॉजिटिव रखिये धन्यवाद

(12) जो जाता है वो आता है ||||

एक बार एक आदमी ने एक बूढ़ी औरत को अकेले सड़क के किनारे खड़े देखा मगर कम रौशनी में भी वह देख सकता था की उन्हें मदद की जरुरत है इसलिए उसने अपनी पोंटिएक कार उनकी मर्सिडीज के आगे रोकी और निकल कर बहार आया उसकी अपनी कार अभी चालू थी आदमी के चेहरे पर हंसी देख कर भी औरत चिंतित थी पिछले एक घंटे से कोई मदद करने नहीं रुका था क्या वो उसे नुकसान पहुंचाने वाला था वो उसे देख कर सुरक्षित नहीं मह्सूस कर रही थी वो गरीब और भूखा दिख रहा था आदमी देख सकता था की ठण्ड में खड़ी वो औरत डरी हुई है वो समझ सकता था वो कैसा महसूस कर रही है ये वो ठंडी सिहरन थी जो केवल डर से आती है उसने कहा मै आपकी मदद करने आया हूँ मैडम क्यों नहीं आप मेरी कार में बैठे वहा गरम है वैसे मेरा नाम ब्रायन एंडरसन है खैर उनकी गाडी का सिर्फ टायर पंचर हुआ था मगर एक बूढ़ी औरत के लिए यह काफी खराब परस्थिति थी ब्रायन कार के निचे जा कर जैक लगाने की जगह तलाशने लगा जिसमे एक दो बार उसके हाथ छील भी गए जल्द ही उसने टायर बदल दिया मगर वह गन्दा हो गया था और उसके हाथ छील गए थे जब वह पेंच टाइट कर रहा था तब औरत ने सीसा निचे किया और उससे बात करने लगी उन्होंने बताया की वह सेंट लुइस से है और बस यहां से गुजर रही थी वो उसकी शुक्रगुजार थी की उसने आ कर उसकी मदद की ब्रायन मुस्कुराया और उनकी कार की डिक्की बंद कर दी औरत ने पूछा उन्हें इसके कितने पैसे देने है वो जो बोलेगा वो देने के लिए वह तैयार थी वो पहले ही वो सारे बुरे ख्याल सोच चुकी थी जो उनके साथ हो सकता था अगर वह नहीं आता ब्रायन ने एक दफा भी पैसो के बारे में नहीं सोचा ये कोई उसकी नौकरी नहीं थी ये किसी जरुरत मंद की मदद करना था पर भगवान् जानता था ऐसे बहुत से लोग है जिन्होंने समय पर उसकी मदद की थी उसने अपनी पूरी जिंदगी ऐसे ही जी थी और उसे इसके अलावा और किसी तरह से रहना नहीं आता था उसने कहा अगर वो वाकई में उसकी मदद करना चाहती है तो भविष्य में अगर कोई जरूरतमंद कभी दिखे तो उसकी मदद कर दे और ब्रायन ने कहा बस मुझे याद कर लेना उसने इंतज़ार किया जब तक वह महिला अपनी कार शुरू कर के निकल नहीं गयी वो एक ठंडा और निराशामय दिन था मगर जब डूबते सूरज के धुंधलके में वह घर जा रहा था वह खुश महसूस कर रहा था कुछ मिल चलने पर उस औरत को एक छोटा सा ढाबा दिखा वो अंदर कुछ खाने के लिए गयी ताकि घर पहुंचने के आखरी पढ़ाव से पहले कुछ गर्मी हांसिल कर ले ढाबा कुछ संदिग्ध सा दिख रहा था बाहर दो गैस के लैंप से जल रहे थे सारा नजरिया नया नया सा लग रहा था वहा काम करने वाली लड़की नया साफ तौलिया ले कर आयी ताकि वह अपने गीले बाल पोंछ सके पुरे दिन काम करने के बाद भी उसके चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान थी महिला ने देखा वह लड़की लगभग आठ महीने गर्भ से थी मगर उसके दर्द और तकलीफो ने उसके बर्ताव में कोई कमी नहीं आने दी थी बुजर्ग महिला सोच में पड़ गयी की कोई जिसके पास इतना कम है वो किसी अनजाने के साथ भी कितनी अच्छी तरह से बर्ताव कर रही है तब उसे ब्रायन का ख्याल आया महिला ने खाना खाया और भुगतान के लिए सो डॉलर का नोट दिया लड़की तुरंत बचे पैसे लाने चली गयी मगर तब तक बुजुर्ग महिला दरवाजे से चुपचाप से निकल गयी जब तक लड़की वापस आयी तब तक महिला जा चुकी थी लड़की सोचने लगी की वह कहा गयी तब उसने नैपकिन पर कुछ लिखा हुआ देखा जब उसने पढ़ा की वो महिला क्या लिख कर गयी थी तो उसकी आँखों में आंसू आ गए तुम्हे मुझे कुछ लौटाने की जरुरत नहीं है में भी कभी तुम्हारी जगह पर थी कभी किसी ने मेरी मदद की थी जैसे आज में तुम्हारी कर रही हु अगर तुम मुझे वाकई लौटाना चाहती हो तो तुम ये कर सकती हो एक प्रेम की चैन को यही रुकने मत देना नेपकिन के निचे चार सो सो के नोट थे खैर टेबल साफ़ करनी थी चीनी के जार भरने थे और लोगो को खाना परोसना था मगर लड़की ने दिन निकल ही लिया उस रात जब वो घर पहुँच कर अपने बिस्तर पर आयी तो वो उस महिला का लिखा नोट और उन पैसो के बारे में सोचने लगी उस महिला को कैसे पता चला की इस वक़्त उसे और उसके पति को इन् पैसो की कितनी जरुरत थी अगले महीने बच्चे के आने से मुश्किलें बढ़ने वाली थी पास में ही उसका पति सोया हुआ था वो जानती थी की वह कितना परेशान था उसने उसे एक हल्का सा चुम्बन दिया और धीरे से कान में फुसफुसाया सब ठीक हो जायेगा में तुमसे बहुत प्यार करती हु ब्रायन एंडरसन !

एक पूरी कहावत है जो जाता कई वही लौट कर आता है

(11) STEPHEN HAWKING!!!!

Stephen william hawking he is a theoretical physicist and cosmologist. he was born on january 8 1942 in oxford, England. his father name was frank hawking and mother name is Isobel Eileen Hawking . his father was a medical researcher and mother was of the first female students who has graduated from oxford university. his father wanted him to study medicine, but he decided to pursue mathematics. however, as the subject was not taught at the university collage oxford at that time he took up physics. he graduated in 1962 and join trinity hall cambridge for PHD in cosmology he got married with jane white in 14 july 1965 at the age of 23 they got three childern. the institute of astronomy at cambridge in 1968 and the discoveries of cosmologist roger penguins on black hole really fascinated him in 1970 hawking discovered the second law of black hole dynamics, and he proposed the four law of black hole mechanics. in 1973. he became a fellow of the royal society. in 1975 he was awarded the ending tin metal and the pius xi gold medal followed by the dannie heiman prize the maxwell prize etc. hawking appointed as professor in gravitational physics in 1977 and received the albert einstein medal and an honorary decorate from the university of oxford in 1979. he gradually sterted losing centrol over his each and then he appointed as the lucasian professor of mathmatics of the cambridge university in 1985. he lost his voice after a tragedy out me as a result or this he require 24 hour care. A californian computer programmer invented a speaking program that could be directed by head or eye movement in 1988 hawking published a brief history of time which was a somplifed version or cosmology for the masses the book became an instant bestseller selling more than 10 million copies in 20 years. a brief history of time god created the integers seorgia secret key to the universe etc. he made constant appearance on television during this period in documentaries like the real stephen hawking . stephen hawking master of the universe etc. the couple separated in 1990 and divorced in 1995. hawking married to his nurse elaine mason in 16 september 1995 at the age of 53 the second marrage lasted only for 11 years and the couple got divorced in 2006. hawking retired as lucasian professor of mathmatics in 2009. he has continued to work as a director or research at the department or applied mathmatics and theoretical physics. in 2010 he co-wrote a book with leonard title the grand theory which focused on the universe and 11 dimensions of a theory. an interview with abc news. he said one kind proof that god does not exist. that science makes got unnecessary. in 2015 hawking became a part of the breakthrough initiative a program founded by russian bollionaire yuri milner to research for life in a universe, which is a hundred million doller project that will research 1 million stars for artificial or laser signals. he died 14 march 2018 at cambridge england at the age of 76 we need to find another planet live on with in 100 years human agression and nuclear technology will kill us in the end robots will take over the world said stephen hawking