(35) असली शान्ति ||||

एक बार एक राजा था जिसने घोषित किया की जो कलाकार शान्ति का सबसे अच्छा चित्र बनाएगा उसे इनाम दिया जायेगा। कई कलाकारों ने कोशिश की। राजा ने सभी चित्र देखे मगर अंत में दो चित्र सबसे ज्यादा पसंद आये जिनमे से उन्हें एक चुनना था।

एक तस्वीर एक शांत सरोवर की थी उस सरोवर में आस पास के शांत पहाड़ो की झलक दिख रही थी ऊपर नीला आसमान और रुई से बादल थे जिसने भी यह चित्र देखा उसने माना की यह शांति की उचित तस्वीर है दूसरे चित्र में भी पहाड़ थे मगर वो कठोर और सूखे थे ऊपर नाराज आसमान था जिससे बारिश हो रही थी और बिजली चमक रही थी पहाड़ के पास से उफनता हुआ झरना बह रहा था यह कही से शांति का चित्र नहीं लग रहा था। मगर जब राजा ने गहराई से देखा तो झरने के पीछे चट्टानों के बीच से एक झाडी निकल रही थी उस झाडी में एक चिड़िया ने एक घोसला बना रखा था उस गुस्से में बहते पानी के बीच वो मादा चिड़िया अपने घोसले में बैठी हुई थी शान्ति से।

क्या लगता है आपको कौन से चित्र को इनाम मिलना चाहिए।

राजा ने दूसरा चित्र चुना। जाने है क्यों। क्योकि राजा ने समझाया शान्ति का मतलब ऐसी जगह नहीं है जहा शोर,मुश्किल और काम न हो। शान्ति का अर्थ है इन सबके बीच में रहते हुए भी मन में शान्ति होना।

यही है शान्ति का असली अर्थ।

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