(33) अपनी चिंताओं को जाने दें ||||

एक मनोवैज्ञानिक कमरे में घूम कर वहा बैठे लोगो को अपनी चिंताओं पर काबू करने के बारे में सीखा रही थी। जब उसने पानी का एक गिलास उठाया तो लोगो ने सोचा की वह पूछेगी वही सवाल की गिलास आधा भरा हुआ है या खाली है। मगर चेहरे पर एक मुस्कान के साथ उसने पूछा ये पानी का गिलास कितना भारी है।

जवाब आये 8 ग्राम से 20 ग्राम के बीच में।

उसने जवाब दिया की इसका वजन मायने नहीं रखता। फर्क इससे पड़ता है की मै इसे कितनी देर पकड़ी रहती हु अगर मुझे इसे एक मिनट पकड़ना है तो कोई मुश्किल नहीं है अगर मुझे इसे एक घंटा पकड़ कर रखना पड़े तो मेरा हाथ दुखने लगेगा। अगर मैं इसे एक दिन पकड़ कर रखू तो मेरा हाथ सुन्न पड़ जायेगा और पंगु हो जायेगा। हर हालात में गिलास के वजन में कोई फर्क नहीं आया। मगर जितनी देर मैंने इसको पकड़ कर रखा ,उतना ये भारी होता गया।

उसने आगे कहा जिंदगी में आने वाली चिंताए और दुःख भी इस पानी के गिलास की तरह है इनके बारे में थोड़ी देर सोचिये और कुछ नहीं होगा। इनके बारे में कुछ ज्यादा देर सोचिये तो ये दर्द पहुंचाने लगेंगे और अगर आप इनके बारे में पूरा दिन सोचेंगे। तो ये आपको पंगु बना देंगे फिर आप कुछ करने के काबिल नहीं रहेंगे।

जरुरी है यह याद रखना की आपको अपनी चिंताओं को जाने देना है श्याम को जितना जल्दी हो सके अपनी सभी चिंताओं को नीचे रख दे। उन्हें श्याम से रात में न ले जाये गिलास को नीचे रखना याद रखिये। खुश रहिये मुस्कुराते रहिये। धन्यवाद

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