(32) ईमानदारी ||||

एक बार एक दूर पूर्व में एक राजा होता था जो बूढ़ा हो रहा था वह जानता था की अब उसे अपना उत्तराधिकारी चुन लेना चाहिए अपने बच्चो या मंत्रियो में से किसी को चुनने की बजाए उसने कुछ अलग करने का निर्णय किया।

उसने प्रजा के हर नौजवान को एक साथ बुलाया। उसने कहा समय आ गया है की मै सिंघासन से उतर जाऊ और अगला राजा बनाऊ। मैंने तुम्हारे बीच से चुनाव करने का फैसला किया है बच्चे स्तब्ध रह गए मगर राजा ने आगे कहा मैं तुम सबको आज एक एक बीज दूंगा केवल एक बीज। ये बहुत ख़ास बीज है मैं चाहता हु की आप ये बीज लेकर घर जाये इसे उगाये ,पानी दे और साल भर बाद इस बीज का क्या रूप है मेरे पास लेकर के आये। आपके लाये पौधे मैं आंकूंगा और जिससे मैं चुनुँगा उससे देश का अगला राजा घोषित कर दिया जायेगा।

उस दिन वहा एक लिंग नाम का लड़का था जिसे भी ओरो की तरह एक बीज मिला। उत्साहित वह घर पहुंचा और अपनी माँ को सारी कहानी कह सुनाई। माँ ने गमला और मिटटी लाने में उसकी मदद की जिसमे उसने बीज को लगाया और उसे पानी दिया। हर रोज वह उसे पानी देता और उसके बढ़ने का इंतज़ार करता।

तीन हफ्ते बाद कुछ अन्य युवक अपने बीज और उसके उगने के बारे में बात करने लगे। लिंग घर जा कर अपना बीज देखता है मगर वहा कुछ नहीं था तीन ,चार ,पांच हफ्ते बीत गए मगर कुछ नहीं।

अब तक सब अपने अपने पौधे के बारे में बात कर रहे थे मगर लिंग के पास उस गमले में कुछ नहीं था उसे यकीन हो गया की उसने अपने बीज को मार डाला है। बाकि सब के पास पेड़ ,ऊँचे पौधे थे मगर उसके पास कुछ भी नहीं।

मगर उसने अपने दोस्तों से कुछ नहीं कहा।

वो केवल अपने बीज के उगने का इंतज़ार करता रहा।

साल बिता और प्रदेश के सारे नौजवान अपने अपने पौधे लेकर राजा के पास पहुंचे। लिंग ने अपनी माँ से कहा की वह खाली गमला लेकर नहीं जायेगा। मगर उन्होंने उसे अपना गमला लेकर जाने के लिए और ईमानदारी से सच बोलने के लिए प्रोत्साहित किया। लिंग को यह बिलकुल अच्छा नहीं लग रहा था मगर वह जनता था माँ सही कह रही है वो अपना खाली गमला लेकर महल पहुंचा।

जब लिंग वहा पहुंचा तो वह नौजवानो के अलग अलग पौधे देख कर हैरान रह गया। वे सारे ही बेहद खूबसूरत और भिन्न भिन्न ऊंचाई और प्रकार के थे। लिंग ने अपना खाली गमला जमीन पर रखा जिसे देख कर बाकि बच्चे हंस पड़े। कुछ ने उसके साथ सहानभूति जताई और कहा अच्छी कोशिश थी दोस्त।

राजा जब कमरे में आये तो सभी नौजवानो का अभिनन्दन किया और कमरे का जायजा लिया। लिंग पीछे छुपने की कोशिश करता रहा। राजा ने पौधे देख कर कहा। मेरे भगवान। क्या बेहतरीन पौधे , पेड़ और फूल है।

अचानक कमरे के बीच खाली गमला लिए खड़े लिंग पर राजा की नज़र पड़ी। उन्होंने अपने सैनिको से उसे सामने लाने को कहा। लिंग घबरा गया। राजा को पता चल गया की मैं एक नाकामयाब युवक हु। शायद अब मुझे मरवा देंगे।

लिंग जब सामने आया तो राजा ने उससे उसका नाम पूछा। उसने बताया जी मेरा नाम लिंग है। सारे बच्चे हंस रहे थे और उसका मजाक बना रहे थे। राजा ने सबको शांत हो जाये का आदेश दिया। उसने लिंग की और देखा और घोषणा की।

अपने नए राजा का सत्कार करे। उसका नाम लिंग है लिंग को यकीन नहीं हुआ। वह अपना बीज भी नहीं उगा पाया था वह राजा कैसे बन सकता था।

तब राजा ने कहा सालभर पहले मैंने सबको एक एक बीज दिया था मैंने कहा था की इसे घर ले जाये,उगाये ,पानी दे और आज वापस मेरे पास लेकर आये। मगर मैंने आप सब को उबले हुए बीज दिए थे जो उग ही नहीं सकते थे। आप सब, सिवाए लिंग के मेरे पास पेड़ ,पौधे ,फूल लेकर आये है। जब आपने देखा की बीज नहीं उग रहा है आपने उसे दूसरे बीज से बदल दिया। सिर्फ लिंग में वो बहादुरी और ईमानदारी थी की वह गमले में वही बीज लेकर आया। इसलिए ये ही है वह जो नया राजा बनाया जायेगा।

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