(31) तक़लीफो का सामना सकारात्मक तरीके से करे ||||

ये कहानी एक किसान की है जिसके पास एक बूढ़ा खच्चर था वो खच्चर एक दिन किसान के कुए में गिर गया किसान ने खच्चर को भगवान् को याद करते सुना या वो जो भी खच्चर करते है जब वो कुए में गिर जाते है माजरा समझने के बाद किसान को खच्चर के लिए दुःख हुआ मगर उसने तय किया की ना ही वो खच्चर और ना ही वो कुआ बचाये जाने के लायक है। उसने अपने पड़ोसियों को बुलाया और बताया की क्या हो गया और उनसे मदद मांगी की वे कुए में मिटटी डाल कर खच्चर को वही दफना दे और उसे उसकी पीड़ा से मुक्ति दे।

पहले तो खच्चर ये सुन कर पागल हो गया मगर जैसे जैंसे किसान और उसके पडोसी मिटटी डालते गए और वो उसकी पीठ पर पड़ती गयी उससे एक तरकीब सूझी की हर बार जब मिटटी उसके ऊपर पड़ती है तो वह उसे झाड़ कर उसके ऊपर चढ़ सकता है और वह ये करता गया झाड़ो और चढ़ो,,,,,झाड़ो और चढ़ो ,,,,,झाड़ो और चढ़ो। वह खुद को प्रोत्साहित रखने के बोलता गया जितना भी दर्द होता जितनी भी परस्थिति ख़राब होती लगती वो बूढ़ा खच्चर अपने डर से लड़ता बस ये सोच कर बढ़ता गया झाड़ो और चढ़ो।

कुछ ही समय में बूढ़ा खच्चर घायल और थका हुआ कुए की दिवार को जीत कर लांग गया जो लगता था की उसे दफना देगा वही उसे बाहर ले आया सिर्फ उसकी समस्या के जूझने के तरीके की वजह से।

यही जिंदगी है हमें अपनी तक़लीफो का सामना करना चाहिए और उनका सकारात्मकता से हल निकलना चाहिए और डर, कड़वाहट और अफ़सोस को जगह नहीं देनी चाहिए।

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