(29) क्षमा करो और भूल जाओ||||

एक बूढ़े आदमी की अपने इकलौते बेटे से बहस हो गयी उसने बहुत बार माफ़ी मांगी मगर उस नौजवान ने उसकी एक ना सुनी। पिता ने हार नहीं मानी क्योकि वो अपने बेटे से बेहद प्यार करते थे मगर बेटे ने उन्हे माफ़ नहीं किया क्योकि वो अपने घमंड में चूर था

सालो गुजर गए और जब वो बूढ़ा आदमी अपनी मौत के नजदीक था उसने अपने बेटे से रिश्ता बनाने की आखरी कोशिश की मगर बेटा नहीं माना और बूढ़ा आदमी अपने दिल में अपार दर्द लिए सिधार गया

इस दौरान बेटे का भी एक बेटा हो गया था जो अब एक नवयुवक बन चूका था उसने अपने बेटे को कभी अपने पिता के बारे में नहीं बताया था जब भी वो अपने दादा के बारे में पूछता उसे इस बारे में बात करने से मना कर देता।

एक दिन उन दोनों में बहुत बहस छिड़ जाती है और उसका बेटा भी घर छोड़कर चला जाता है जैसे कई सालो पहले वो चला गया था वो बहुत दुखी हो जाता है इस बार उसमे कोई घमंड नहीं था मगर वो खुद को बहुत अकेला महसूस करता है

उसे लगा कि उसने अपने बेटे को हमेशा के लिए खो दिया है और जिन्दगी में पहली बार भगवान से प्रार्थना की और रुख किया तभी उसे एहसास हुआ कि इतने सालो पहले उसके पिता को कैसा महसूस हुआ होगा उसे याद आया कि कैसे उसने अपने पिता को दुःख पहुंचाया था और उसे एहसास हुआ की उसने उन्हें कितना बड़ा दुःख दिया था जितना वो सोचता गया उसे समझ आता गया की उसने अपने पिता के साथ कितना गलत किया था उस आदमी के साथ जिसने उसे सारी जिन्दगी सब कुछ दिया

इन दुखद ख्यालो के साथ वो सोफे पर ही सो गया अगले दिन सुबह जब उसकी नींद खुली तो उसने देखा वह आराम से अपने पलंग पर सो रहा है और उसका बेटा उसके सामने खड़ा है उसे अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था बाप बेटा दोनों गले लग कर बहुत रोये

एक दूसरे से अनेक माफिया मांगने के बाद बेटे ने कहा की अभी तक वह अपने पिता से बहुत नफरत करता था मगर रात को उसे एक अजीब सपना आया जो उसके दिल को छू गया उसने सपने में देखा की एक बूढ़ा आदमी उसे गले लगा रहा है।

और जब उसे उस आदमी को गले लगाया तो उसकी सारी नफरत प्यार में बदल गयी उस बड़े आदमी ने तब उसे सलाह दी की वो क्षमा करे और भूल जाये

उसने बताया की जैसे ही वह सुबह उठा वह दौड़ता हुआ अपने पिता के घर आ गया तब उस आदमी ने अपने बेटे को बताया कि उसी रात उसने भी जरूरी सबक सीखा कैसे उसने अपने पिता को दुख पहुंचाया था जब वह जवान था उसका बेटा अपने दादा के बारे में जानना चाहता था जिनसे वो कभी मिला नहीं था देखा नहीं था और अब यह सबसे सही वक्त था आदमी जा कर अपने पिता कि तस्वीरों वाली एल्बम ले आया बेटे ने जब तस्वीरें देखी तो वो भौंचक्का गया उसने बताया की तस्वीर वाला आदमी वही है जो कल रात उसके सपने में आया था।

One thought on “(29) क्षमा करो और भूल जाओ||||

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: