(25) एक मेंढक की कहानी ||||

एक बार मेंढको का एक झुंड जंगल से होकर गुजर रहा था की उसमे से दो एक गहरे गड्ढ़े में गिर गए सारे मेंढक के आस पास खड़े हो गए जब उन्होंने देखा की कितना गहरा गड्डा है तो उन्होंने दोनों मेंढ़को से कहा कि उनका बचना मुश्किल है दोनों मेंढको ने उनकी बातो को नजरअंदाज किया और कूद कर वहां से बाहर निकलने की कोशिश करते रहे।

बाकि मेंढक उन्हें कहते रहे की कोशिश अब बेकार है और उनका मरना तय है आख़िरकार एक मेंढक ने उनकी बात मान ली और हार मान ली वह निचे गिरा और मर गया। दूसरा मेंढक पूरी ताक़त से कूद ता रहा मगर बाकि मेंढको ने उससे कोशिश करके अपना दर्द बढ़ाने की बजाए मर जाने की सलाह दी।

और उसने और ताक़त से छलांग लगाई और इस बार बाहर निकल गया जब वह बाहर निकला दूसरे मेंढको ने कहा तुम्हे क्या हमारी आवाज सुनाई दे रही थी मेंढक ने समझाया की वह बहरा है पुरे समय वह यही समझता रहा की वे उससे प्रोत्साहित कर रहे है

सीखने योग्य बातें ;

1 …. जुबान में जीने मरने की ताक़त होती है कोई जो हताश हो,प्रोत्साहन के चंद शब्दों से खिल सकता है और आपने दिन ख़ुशी से जी सकता है।

2 ….जब कोई हताश हो तो अनुचित शब्द उससे मौत की और धकेल सकते है।

सोच कर बोले जो भी आपके रास्ते से गुजरे उससे जिंदगी फुकने वाली बात कहे। शब्दों की ताक़त। ….यह कई बार समझना मुश्किल हो जाता है की प्रोत्साहन देने वाले शब्द कितनी दूर ले जा सकते है मुश्किल समय में जिंदगी से उसकी चमक छीनने वाले शब्द तो बहुत लोग बोल सकते है ख़ास वो है जो दुसरो को आगे बढ़ाने के लिए वक़त निकाले।

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