(24) जब हम भविष्य की बात करते है भगवान हंसते है ||||

एक बार एक गांव में गांववाले मिटटी की छतो वाले झोपडो में रहते थे सिर्फ एक सीमेंट की बनी पवित्र बिल्डिंग थी पुरे गांव में। उस पवित्र बिल्डिंग में एक पादरी रहते थे जिन्हे गांववाले भगवान का रूप मानते थे और उनकी बहुत इज्जत करते और उन पर भरोसा करते थे एक बार बहुत तेज बिजली कड़की और एक एक करके गांव के सारे मिटटी के झोपड़े जल गए सब शरण लेने उस पवित्र बिल्डिंग की और भागे। सब गांव वाले परेशान थे की एक ही पल में उनकी किस्मत कैसे पलट गयी थी और अब क्या होगा। उन्होंने पादरी से इसका कारण पूछा।

पादरी ने कहा ये इसलिए हुआ है क्योकि हमारे बीच में कोई है जो बुरी किस्मत लेकर आया है जिसके गलत कामो और बुरी आत्मा ने पुरे गांव की किस्मत को ग्रहण लगा दिया है गांव वालो ने पूछा ऐसा कोन हो सकता है पादरी ने जवाब दिया उस बदनसीब को जानने का केवल एक तरीका है की हम सब इस पवित्र बिल्डिंग से बहार चलते है एक एक कर के बरामदे में खड़े होते है जिसकी भी बुरी किस्मत से यह प्रलय आया है उस पर खुद ही बिजली गिर जाएगी वो जल कर खाक हो जायेगा बाकि सब सुरक्षित इस पवित्र बिल्डिंग में रह जायेंगे।

पादरी की सलाह पर गांव वाले एक एक करके पवित्र बिल्डिंग से बहार आते गए और बरामदे में खड़े होते गए अंत में केवल दो लोग बचे थे एक पादरी और एक गरीब बच्चा। अब पादरी भी बरामदे में आकर खड़े हो गए मगर उनपर भी बिजली नहीं गिरी। लोगो ने देखा की अब केवल वो बच्चा बच गया है तो वो उसे ही इस सबके लिए दोषी ठहराने लगे और उसे बुरा बला कहने लगे अब उस बेचारे बच्चे को बरामदे में खड़ा होने के लिए भेज दिया सब इंतज़ार कर रहे थे की उसके ऊपर बिजली गिरेगी और बाकि सब बच जायेंगे बिजली गिरी मगर पवित्र बिल्डिंग पर। सारे गांव वाले जलकर राख हो गए पादरी भी। सिर्फ वो बच्चा बच गया जो बरामदे में खड़ा था।

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