(23)हर इंसान अपनी चमक में चमकता है||||

एक आदमी जो अपनी अच्छाई और ईमानदारी के लिए जाना जाता था एक जैन साधु के पास उसकी सलाह लेने गया साधु ने जब अपनी प्रार्थना पूरी कर ली तब आदमी ने उनसे पूछा मै इतना हीन क्यों महसूस करता हु मैंने कई बार मौत का सामना किया है कमजोरो की रक्षा की है मगर फिर भी आपको साधना में देख कर मुझे लगा के मैंने अपनी जिंदगी में कुछ ख़ास नहीं किया है रुको एक बार जो ये सब लोग मुझसे मिलने आये है उन्हें देख लू फिर मै तुहारी बात का जवाब दूंगा साधु ने कहा वो आदमी पुरे दिन मंदिर के उदयान में बैठा रहा लोगो को सलाह लेने आते जाते देखता रहा

उसने देखा की साधु कैसे सब को उतने ही धीरज और उजली मुस्कान के साथ मिलते रहे रात को जब सब जा चुके थे उसने कहा क्या आप मुझे सीखा सकते है साधू ने उसे अंदर भुलाया और अपने कमरे में ले गए आसमान में पूर्णिमा का चाँद चमक रहा था और सब और शांति का वातावरण था वो चाँद देख रहे हो कितना सुन्दर है वो पूरी परिक्रमा करेगा और कल सुबह सूरज एक बार फिर से चमक उठेगा मगर सूरज की रौशनी कई ज्यादा है और उसमे हमे अपने आस पास के पेड़, पहाड़, बादल सब नज़र आ जाते है

मैंने दोनों को पिछले कितने ही सालो से देखा है और कभी चाँद को नहीं कहते सुना की मै सूरज की तरह क्यों नहीं चमकता क्या मै उससे हीन हु बिलकुल नहीं उस आदमी ने जवाब दिया सूरज और चाँद दोनों अलग अलग है दोनों की अपनी खूबसूरती है तो तुम जवाब जानते हो हम दोनों एक दूसरे से अलग है दोनों अपने अपने तरीके से अपने विचारो के लिए लड़ रहे है और दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने की कोशिश कर रहे है बाकि सब केवल एक मुखोटे है।

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