एलियन की खोज।।।।

हेलो दोस्तो हमारे ग्रह से अलग दूसरे ग्रह पर रहने वाले लोगो को हम एलियन कहते हैं और उनके स्पेसशिप को हम U F O कहते हैं एलियन की तलाश में जुटी संस्था सर्च फ़ॉर एक्स्ट्रा टेरेस्ट्रियल इंटेलिजेंस बहुत सालो से अंतरिक्ष मे एलियन को ढूंढ रही हैं बताया जा रहा हैं कि हमारी पृथ्वी से रेडियो वेव भी छोड़ी गई हैं ताकि हमारी जो रेडियो वेव हैं वो एलियन तक पहुंच जाए और हम एलियंस का पता लगा सके पर कुछ साइंटिस्ट्स ने रेडियो वेव भेजने का विरोध किया हैं उन्होंने कहा हैं कि अगर रेडियो वेव भेजने से हमे एलियन मिल जाते हैं या उन्हें हमारे बारे में पता चलता हैं तो ये हमारे लिए खतरा साबित हो सकता हैं हम दूरबीन ओर सॅटॅलाइट की मदद से एलियन को काफी समय से ढूंढ रहे हैं पर हमें अभी तक कोई सुराख नही मिला हैं पर कुछ लोग U F O को देखने का दावा कर रहे हैं जोकि पिछले कुछ सालों से काफी चर्चा में हैं बताया जा रहा हैं कि अमेरिका के केक्सबर्ग के जंगलों के ऊपर एक अज्ञात वस्तु मंडराती हुई दिखाई दी और कुछ देर बाद आग लग गयी और एक भयंकर विस्फोट हुआ जिससे आस पास का पूरा क्षेत्र हिल गया और लोग इससे देखते ही रह गए

जब विस्फोट हुआ तभी इस क्षेत्र को अमेरिकी सरकार द्वारा घेर लिया गया यह पर किसी को भी जाने की अनुमति नही थी पर नासा ने इससे उल्का पिंड बताया हैं ऐसे ही रूस में भी 1989 में कई बार U F O देखे जाने की खबर मिली हैं रूस में 11 जून के दिन एक महिला ने 17 मिनट्स तक U F O देखने का दावा किया हैं और महिला के साथ 500 लोगो ने ये दावा किया हैं ओर सबसे ज्यादा रोमांचक किस्सा तो वो था जब 17 सितंबर 1989 को रूस के वोरोनल पार्क में बच्चे खेल रहे थे और पार्क में अचानक एक लाल रंग का अंडाकार शिप उतरा वहां बहुत सारे लोग इकठ्ठे हो गए और उसमे से दो एलियन बाहर आये वो करीब 12 ओर 14 फ़ीट लंबे थे एक तो रोबोट के जैसा था बच्चे उन्हें देख कर चीखने लगे और एक बच्चे पर तो उन्होंने लाइट की बीम छोड़ी ओर बच्चा लकवे जैसी स्थिति में पहुंच गया

उस जगह की रिसर्च करने पर उस जगह की मिट्टी में रेडिएशन के निशान मिले है और वहां फॉस्फोरस की मात्रा ज्यादा मिली है। और U F O कई टन का बताया जा रहा हैं ऐसे ही इटली में अलिटालिया विमान सेवा में एक यात्री ने U F O को बहुत करीब से देखने का दावा किया है हमने जो रेडियो वेव्स भेजी थी वो अब तक करोड़ो किलोमीटर तक जा चुकी हैं और एलियन तलाशने वाली संस्था S E T I कुछ रेडियो और दूरबीनो की मदद से एलियंस के संदेश को सुनने की कोशिशें कर रही हैं आने वाले समय मे कुछ देश एलियन का पता लगाने के लिए अंतरिक्ष यान के साथ दूरबीनों जैसी तकनीक का भी इस्तेमाल कर सकते है पर फिलहाल S E T I अपनी ये तलाश जारी रख रही हैं तो क्या हम एलियंस को तलाश कर पाएंगे स्टुअर्ट क्लार्क कहते है। की इससे न तो इनकार किया जा सकता हैं ना ही पक्के तौर पर कहा जा सकता है

रोबोट।।।।

आज हम एक जबरदस्त टेक्नोलॉजी के बारे में जानने वाले हैं जिसका नाम रोबोट हैं रोबोट को हम बहुत सारी बॉलीवुड और हॉलीवुड मूवीज में देखते हैं रोबोट क्या हैं और कैसे काम करते हैं ऐसे बहुत सारे सवाल हमारे मन में आते हैं रोबोट एक तरह की मशीन हैं जो खास तोर पर कंप्यूटर के द्वारा डाले गए प्रोग्राम या निर्देशों के आधार पर काम करती हैं रोबोट बहुत मुश्किल कामो को भी बिल्कुल आसानी के साथ कर देते हैं और पूरी सटीकता के साथ करते हैं रोबोट मैकेनिकल सॉफ्टवेयर और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग के कॉम्बिनेशन से बने होते हैं और कुछ रोबोट को कण्ट्रोल करने के लिए एक्स्ट्रा कण्ट्रोल डिवाइस प्रयोग किया जाता हैं और बहुत सारे रोबोट में उनके अंदर ही कण्ट्रोल डिवाइस लगा होता हैं रोबोट को बनाते समय इनकी शेप और साइज पर इतना ध्यान नहीं दिया जाता ऐसा बिलकुल भी नहीं हैं की इंसानो के जैसे दिखने वाले ही रोबोट होते हैं रोबोट कैसी भी शेप और साइज के हो सकते हैं वो तो सइंटीस्टो को जैसा रोबोट से काम लेना होता हैं उन्हें वैसी ही शेप में बना देते हैं अगर इंसानो के जैसा दिखने वाला रोबोट बनाएंगे तो वो सिर्फ इंसानो के जैसे ही काम करेगा

रोबोट के कुछ पार्ट्स के नाम ;-

:-Structure body

:-sensor system

:-muscle system

:-power system

:-brain system

किसी भी रोबोट में मूवमेंट करने वाले फिजिकल स्ट्रक्चर होते हैं जिसमे की एक तरह की मोटर, सेंशर सिस्टम पावर देने के लिए सोर्स और एक कंप्यूटर ब्रेन सिस्टम होता हैं जो पूरी बॉडी को कण्ट्रोल करता हैं रोबोट अलग अलग दिशाओ में घूमने के लिए पिस्टन का प्रयोग करते हैं और उसके ब्रेन सिस्टम में प्रोग्राम बना कर डाला हुआ होता हैं उसी के अनुसार रोबोट पूरी बॉडी को संचालित करता हैं वो लिखे हुए प्रोग्रम्मो के आधार पर काम करता हैं जब हमे उससे कोई दूसरा काम लेना होता हैं तो हमे प्रोग्रम्मो को दुबारा लिख कर डालना होगा

ब्लैक होल….

ब्लैक होल हमारे स्पेस में एक होल होता हैं जो उसके इवेंट होराइजन में आने वाली सभी चीजों को खींच कर अपने अंदर निगल लेता हैं और उसके अंदर से एक भी चीज बहार निकल कर नहीं आती ब्लैक होल अपने अंदर से लाइट को भी पास नहीं होने देता ये अपने अंदर लाइट को अवसोसित कर लेते हैं और कुछ भी परावर्तित नहीं करते इन्हे देखना बड़ा मुश्किल होता हैं अंतरिक्ष में जब कोई विस्फोट होता अक्सर साइंटिस्ट इन्हे उन विस्फोट से पैदा होने वाली लाइट मैं देखने की कोसिस करते हैं या फिर इनके आस पास के गुरुत्वाकर्षण बल से इनका पता लगता हैं हमारी गैलेक्सी के बीच में भी एक सुपर मैसिव ब्लैक होल हैं जिसके चारो और हमारा सोर मंडल और बाकि ग्रह घूमते रहते हैं कुछ छोटे ब्लैक होल भी होते हैं कुछ बड़े ब्लैक होल भी होते हैं जब हमारे यूनिवर्स की उत्पति हुई थी तभी ब्लैक होल का जन्म हुआ था जो बड़े ब्लैक होल होते हैं उनका द्रव्यमान तो सूर्य के द्रव्यमान से करोडो गुना बड़ा हो सकता हैं 1915 ईस्वी में साइंटिस्ट अल्बर्ट आइंस्टीन ने थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी दी वो ये पहले ही सिद्ध कर चुके हैं की गुरुत्वाकर्षण बल प्रकाश की गति पर वास्तव में प्रभाव डालता हैं 1974 ईस्वी में स्टीफन हौकिंग ने दिखाया की ब्लैक होल पूरी तरह काले नहीं होते बल्कि ये थोड़ी मात्रा में तापीय विकिरण भी निकलते हैं अब तक सइंटीस्टो द्वारा ये स्वीकार किया गया है की हर एक गैलेक्सी के केंद्र में एक सुपर मैसिव ब्लैक होल होता हैं