(30) ये समय भी निकल जायेगा

एक अमीर बुढा मरने वाला था डाक्टर कह चुके थे की वह छ महीने से ज्यादा जिंदा नहीं रहेगा अब इस बूढ़े आदमी के तीन बेटे थे उसने उन्हें अपने पास बुलाया और उन तीनो के बीच अपनी जायदाद बराबर बराबर बाट दी मगर अपने सबसे छोटे बेटे को उसने एक छोटी अंगूठी और भेट की। उसने कहा क्योकि तुम मेरे सब से छोटे बेटे हो और तुम औरो जितना तुजर्बा नहीं है में तुम ये अंगूठी देता हु जब बी कोई परेशानी हो कोई कठिन परिस्थिती हो इस अंगूठी को इस्तेमाल करना उसे पहले नहीं और आखरी में इस अंगूठी का किसी से ना करना सबसे छोटे बेटे ने अंगूठी लि अपनी ऊगली में पहनी और धिरे धिरे उसके बारे में बिलकुल बुल गयी तीनो बेटो ने अपना अपना व्यापार लगाया सबसे छोटे ने जहाज का बिजनस शरू किया एक बार एक ही दिन में उसके दो जहाज डूब गए नतीजतन एक ही झटके उसकी साडी दौलत चली गई और वो सड़क पर आ गया उसे अपना घर बचना पड़ा और उसके दरवाजे के बाहर लेनदारों की कतार के चलते वो सोचने लगा की इस परेशानी को कैसे निकले तभी उसे अपने पिता की सलाह याद आई उसने अपनी अंगूठी निकली उसे देखा उसने देखा की पत्थर के निचे कुछ लिखा हुआ था वो तुरंत पत्थर को पॉलिश करने में लग गया ताकि वो पढ़ सके वह क्या लिखा है बहुत पॉलिश करने के बाद उसने लगा क़ि इतना बारीक़ वो अपनी आखो से नहीं पड़ पायेगा वो एक आवर्धिक लेस ले कर आया और जोर देकर शब्द पड़ने लगा जो उसने पड़ा उससे उसकी जिंन्दगी हमेशा के लिए बदलने वाली थी वहा लिखा था मेरे बेटे तसल्ली रखो ये समय भी बीत जायेगा इसे छोटे से वाक्य ने जिन्दगी बदल दी।

(29) क्षमा करो और भूल जाओ

एक बूढ़े आदमी की अपने इकलौते बेटे से बहस हो गयी उसने बहुत बार माफ़ी मांगी मगर उस नौजवान ने उसकी एक ना सुनी। पिता ने हार नहीं मानी क्योकि वो अपने बेटे से बेहद प्यार करते थे मगर बेटे ने उन्हे माफ़ नहीं किया क्योकि वो अपने घमंड में चूर था

सालो गुजर गए और जब वो बूढ़ा आदमी अपनी मौत के नजदीक था उसने अपने बेटे से रिश्ता बनाने की आखरी कोशिश की मगर बेटा नहीं माना और बूढ़ा आदमी अपने दिल में अपार दर्द लिए सिधार गया

इस दौरान बेटे का भी एक बेटा हो गया था जो अब एक नवयुवक बन चूका था उसने अपने बेटे को कभी अपने पिता के बारे में नहीं बताया था जब भी वो अपने दादा के बारे में पूछता उसे इस बारे में बात करने से मना कर देता।

एक दिन उन दोनों में बहुत बहस छिड़ जाती है और उसका बेटा भी घर छोड़कर चला जाता है जैसे कई सालो पहले वो चला गया था वो बहुत दुखी हो जाता है इस बार उसमे कोई घमंड नहीं था मगर वो खुद को बहुत अकेला महसूस करता है

उसे लगा कि उसने अपने बेटे को हमेशा के लिए खो दिया है और जिन्दगी में पहली बार भगवान से प्रार्थना की और रुख किया तभी उसे एहसास हुआ कि इतने सालो पहले उसके पिता को कैसा महसूस हुआ होगा उसे याद आया कि कैसे उसने अपने पिता को दुःख पहुंचाया था और उसे एहसास हुआ की उसने उन्हें कितना बड़ा दुःख दिया था जितना वो सोचता गया उसे समझ आता गया की उसने अपने पिता के साथ कितना गलत किया था उस आदमी के साथ जिसने उसे सारी जिन्दगी सब कुछ दिया

इन दुखद ख्यालो के साथ वो सोफे पर ही सो गया अगले दिन सुबह जब उसकी नींद खुली तो उसने देखा वह आराम से अपने पलंग पर सो रहा है और उसका बेटा उसके सामने खड़ा है उसे अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था बाप बेटा दोनों गले लग कर बहुत रोये

एक दूसरे से अनेक माफिया मांगने के बाद बेटे ने कहा की अभी तक वह अपने पिता से बहुत नफरत करता था मगर रात को उसे एक अजीब सपना आया जो उसके दिल को छू गया उसने सपने में देखा की एक बूढ़ा आदमी उसे गले लगा रहा है।

और जब उसे उस आदमी को गले लगाया तो उसकी सारी नफरत प्यार में बदल गयी उस बड़े आदमी ने तब उसे सलाह दी की वो क्षमा करे और भूल जाये

उसने बताया की जैसे ही वह सुबह उठा वह दौड़ता हुआ अपने पिता के घर आ गया तब उस आदमी ने अपने बेटे को बताया कि उसी रात उसने भी जरूरी सबक सीखा कैसे उसने अपने पिता को दुख पहुंचाया था जब वह जवान था उसका बेटा अपने दादा के बारे में जानना चाहता था जिनसे वो कभी मिला नहीं था देखा नहीं था और अब यह सबसे सही वक्त था आदमी जा कर अपने पिता कि तस्वीरों वाली एल्बम ले आया बेटे ने जब तस्वीरें देखी तो वो भौंचक्का गया उसने बताया की तस्वीर वाला आदमी वही है जो कल रात उसके सपने में आया था।

(28) जिम्मेदारियाँ ||||

एक बार जो ई ब्राउन नामी अभिनेता व हास्य अभिनेता सैनिको के एक बड़े ग्रुप को सम्बोधित कर रहे थे जब भी वह ख़तम करना चाहते सैनिक शोर मचा कर उन्हें कार्यक्रम बढ़ाने को कहते। फिर एक ने कहा जो गन्दी कहानिया सुनाओ सन्नाटा इतना गहरा छाया की सुई गिरने की आवाज भी सुनाई दे जाती। सब लड़के जो को देख रहे थे जो एक मिनट रुके और फिर ये भूल कर की वह यह लोगो का मनोरंजन करने के लिए है उसने अपने बेटो के तरह बोले।

सुनो बच्चो मै दस साल का था जब से स्टेज पर हु मैंने हर तरह के लोगो को हर तरह के जोक सुनाये है मगर मुझे गर्व है की इस पुरे समय में मुझे लोगो को हँसाने के लिए कभी गंदे जोक नहीं सुनाने पड़े मुझे भी कुछ गन्दी कहानिया पता है बच्चो मैंने अपनी जिंदगी में ऐसी बहुत सी कहानिया सुनी है मगर मैंने शुरू से ही एक नियम बना रखा है की मै ऐसी कोई कहानी नहीं सुनाऊंगा जो मै नहीं चाहता की मेरी माँ मुझे सुनाते हुए सुने।

उनका ये वाक्य ख़तम होने पर तालियों की इतनी बड़ी गड़गड़ाहट गुंजी जैसी उन्होंने पहले कभी नहीं सुनी थी कई मिनटों तक वे लोग चिल्लाते रहे और तालिया बजाते रहे इनमे वह लड़का भी था जिसने गन्दी गालिया सुनाने की फरमाईश की थी मगर किस्सा यही ख़तम नहीं हुआ लड़को ने यह बात अपने घर लिख कर अपने अभिभावकों को बताई और उन्होंने अपना शुक्रिया अदा करते हुए जो को लिखा, अपने जो मेरे बेटे के लिए किया उसके लिए मै हर रात प्रार्थना करुँगी।

(27) बेहतर आत्मविश्वास ||||

क्या आप नकारात्मक सलाहों से जल्दी से डर जाने वालो में से है बेहतर आत्मविश्वास के इस छोटे से सबक का अनुसरण करे। हेनरी वार्ड बिचर जब स्कूल में पड़ता था उसने आत्मविश्वास का ऐसा सबक सीखा जो वह कभी नहीं भुला उसे पूरी कक्षा के सामने कवितापाठ के लिए भुलाया गया उसने शुरू ही किया था जब उसकी टीचर ने उसे टोका और चीड़ कर कहा, नहीं , उसने दुबारा से शुरू किया मगर टीचर फिर से कहा , नहीं , शर्मा कर हेनरी बैठ गया अगला लड़का उठा और शुरू हुआ ही था जब टीचर चिल्लाई ,नहीं ,मगर ये लड़का रुका नहीं जब तक की उसने पूरी कवितापाठ ख़तम नहीं कर लिया जब वह बैठा टीचर ने कहा बहुत बढ़िया। हेनरी चीड़ गया उसने शिकायत लहजे में कहा , मैंने भी तो ऐसे ही किया था मगर उन्होंने जवाब दिया सिर्फ सबक जानना ही जरुरी नहीं है उसके बारे में पक्का होना भी जरुरी है जब तुमने मुझे तुम्हे रोकने दिया इसका मतलब था की बहुत पक्के नहीं हो अगर दुनिया कहती है नहीं तो ये तुम्हारा कहो हां। और उसे साबित करो।

हेनरी वार्ड बिचर 19वी सदी के एक जानी मानी धार्मिक सभा के पादरी ,समाज सुधारक , उन्मूलनवादी और प्रवक्ता थे

दुनिया हजार बार कहेगी ,नहीं।

नहीं,तुम ऐसा नहीं कर सकते।

नहीं , तुम गलत हो।

नहीं , तुम बहुत बड़े हो गए हो।

नहीं , तुम बहुत छोटे हो।

नहीं, तुम बहुत कमजोर हो।

नहीं , ये नहीं हो पायेगा।

नहीं , तुम इसके लिए पढ़े लिखे नहीं हो।

नहीं, इसके लिए तुम्हे कुछ पता नहीं है।

नहीं , तुम्हारे पास पैसे नहीं है।

नहीं, ये नहीं हो सकता।

और हर नहीं, जो आप सुनते है वो आपका आत्मविश्वास थोड़ा थोड़ा करके जंग लगा देता है जब तक की आप हार नहीं मान लेते। हालाँकि आज भी दुनिया कहेगी नहीं , मगर आपमें आत्मविश्वास होना चाहिए कहने का हां , और उससे साबित करे।

(26) जुनून ||||

आठ साल की उम्र में उस छोटे से बच्चे को लगा की उच्च विद्यालय का डिप्लोमा ले लेना अच्छा रहेगा 12 साल का जब वह था वह अपने परिवार के साथ समुन्दर किनारे बैठा मछली पकड़ने की तैयारी कर रहा था वो रस्सियों का एक जाल बिछा रहा था जिससे बहुत सारी मछलिया हुक में फस जाये शाम तक उसकी मछली पकड़ने की रस्सी में पुरे परिवार से ज्यादा मछलिया थी 17 का जब वह था उससे अख़बार बेचने की नौकरी मिली उससे लगा नवविवाहित जोड़े इस काम के लिए सबसे उपयुक्त रहेंगे उसने अपने दोस्तों को इस काम पर रखा की वे उसे उन दम्पतियो के नाम और पते लाकर दे जिन्हे हाल ही में शादी होने का लाइसेंस मिला हो उसने उन सबको 2 हफ्ते का सब्सक्रिप्शन फ्री देते हुए पत्र लिखे उसने इससे 18000 डॉलर कमाए और एक महंगी BMW कार खरीदी।

19 साल की उम्र में उसने कंप्यूटर खरीदना शुरू किया और उन्हें बेहतर बनाने लगा उसके ग्राहकों की जरुरत अनुसार कंप्यूटर बनाये और अपने कमरे को ही फैक्ट्री बना कर वह से उन्हें बेचने लगा वह कॉलेज में था मगर पढ़ाई में उसका मन नहीं लगता था उससे कंप्यूटर बेचने का जुनून था।

आखिर तुम करना क्या चाहते हो उसके पिता जी ने पूछा आई बी ऍम से मुकाबला उसने सीधा सा जवाब दे दिया उसके जूनून का नतीजा निकला मई 3 1984 को डैल कारपोरेशन के रूप में वह मात्र 19 साल का था यह आदमी था माइकल डैल ,एक जुनूनी रचनात्मक व्यापारी होने की अनूठी मिसाल।

(25) एक मेंढक की कहानी ||||

एक बार मेंढको का एक झुंड जंगल से होकर गुजर रहा था की उसमे से दो एक गहरे गड्ढ़े में गिर गए सारे मेंढक के आस पास खड़े हो गए जब उन्होंने देखा की कितना गहरा गड्डा है तो उन्होंने दोनों मेंढ़को से कहा कि उनका बचना मुश्किल है दोनों मेंढको ने उनकी बातो को नजरअंदाज किया और कूद कर वहां से बाहर निकलने की कोशिश करते रहे।

बाकि मेंढक उन्हें कहते रहे की कोशिश अब बेकार है और उनका मरना तय है आख़िरकार एक मेंढक ने उनकी बात मान ली और हार मान ली वह निचे गिरा और मर गया। दूसरा मेंढक पूरी ताक़त से कूद ता रहा मगर बाकि मेंढको ने उससे कोशिश करके अपना दर्द बढ़ाने की बजाए मर जाने की सलाह दी।

और उसने और ताक़त से छलांग लगाई और इस बार बाहर निकल गया जब वह बाहर निकला दूसरे मेंढको ने कहा तुम्हे क्या हमारी आवाज सुनाई दे रही थी मेंढक ने समझाया की वह बहरा है पुरे समय वह यही समझता रहा की वे उससे प्रोत्साहित कर रहे है

सीखने योग्य बातें ;

1 …. जुबान में जीने मरने की ताक़त होती है कोई जो हताश हो,प्रोत्साहन के चंद शब्दों से खिल सकता है और आपने दिन ख़ुशी से जी सकता है।

2 ….जब कोई हताश हो तो अनुचित शब्द उससे मौत की और धकेल सकते है।

सोच कर बोले जो भी आपके रास्ते से गुजरे उससे जिंदगी फुकने वाली बात कहे। शब्दों की ताक़त। ….यह कई बार समझना मुश्किल हो जाता है की प्रोत्साहन देने वाले शब्द कितनी दूर ले जा सकते है मुश्किल समय में जिंदगी से उसकी चमक छीनने वाले शब्द तो बहुत लोग बोल सकते है ख़ास वो है जो दुसरो को आगे बढ़ाने के लिए वक़त निकाले।

(24) जब हम भविष्य की बात करते है भगवान हंसते है ||||

एक बार एक गांव में गांववाले मिटटी की छतो वाले झोपडो में रहते थे सिर्फ एक सीमेंट की बनी पवित्र बिल्डिंग थी पुरे गांव में। उस पवित्र बिल्डिंग में एक पादरी रहते थे जिन्हे गांववाले भगवान का रूप मानते थे और उनकी बहुत इज्जत करते और उन पर भरोसा करते थे एक बार बहुत तेज बिजली कड़की और एक एक करके गांव के सारे मिटटी के झोपड़े जल गए सब शरण लेने उस पवित्र बिल्डिंग की और भागे। सब गांव वाले परेशान थे की एक ही पल में उनकी किस्मत कैसे पलट गयी थी और अब क्या होगा। उन्होंने पादरी से इसका कारण पूछा।

पादरी ने कहा ये इसलिए हुआ है क्योकि हमारे बीच में कोई है जो बुरी किस्मत लेकर आया है जिसके गलत कामो और बुरी आत्मा ने पुरे गांव की किस्मत को ग्रहण लगा दिया है गांव वालो ने पूछा ऐसा कोन हो सकता है पादरी ने जवाब दिया उस बदनसीब को जानने का केवल एक तरीका है की हम सब इस पवित्र बिल्डिंग से बहार चलते है एक एक कर के बरामदे में खड़े होते है जिसकी भी बुरी किस्मत से यह प्रलय आया है उस पर खुद ही बिजली गिर जाएगी वो जल कर खाक हो जायेगा बाकि सब सुरक्षित इस पवित्र बिल्डिंग में रह जायेंगे।

पादरी की सलाह पर गांव वाले एक एक करके पवित्र बिल्डिंग से बहार आते गए और बरामदे में खड़े होते गए अंत में केवल दो लोग बचे थे एक पादरी और एक गरीब बच्चा। अब पादरी भी बरामदे में आकर खड़े हो गए मगर उनपर भी बिजली नहीं गिरी। लोगो ने देखा की अब केवल वो बच्चा बच गया है तो वो उसे ही इस सबके लिए दोषी ठहराने लगे और उसे बुरा बला कहने लगे अब उस बेचारे बच्चे को बरामदे में खड़ा होने के लिए भेज दिया सब इंतज़ार कर रहे थे की उसके ऊपर बिजली गिरेगी और बाकि सब बच जायेंगे बिजली गिरी मगर पवित्र बिल्डिंग पर। सारे गांव वाले जलकर राख हो गए पादरी भी। सिर्फ वो बच्चा बच गया जो बरामदे में खड़ा था।

(23)हर इंसान अपनी चमक में चमकता है||||

एक आदमी जो अपनी अच्छाई और ईमानदारी के लिए जाना जाता था एक जैन साधु के पास उसकी सलाह लेने गया साधु ने जब अपनी प्रार्थना पूरी कर ली तब आदमी ने उनसे पूछा मै इतना हीन क्यों महसूस करता हु मैंने कई बार मौत का सामना किया है कमजोरो की रक्षा की है मगर फिर भी आपको साधना में देख कर मुझे लगा के मैंने अपनी जिंदगी में कुछ ख़ास नहीं किया है रुको एक बार जो ये सब लोग मुझसे मिलने आये है उन्हें देख लू फिर मै तुहारी बात का जवाब दूंगा साधु ने कहा वो आदमी पुरे दिन मंदिर के उदयान में बैठा रहा लोगो को सलाह लेने आते जाते देखता रहा

उसने देखा की साधु कैसे सब को उतने ही धीरज और उजली मुस्कान के साथ मिलते रहे रात को जब सब जा चुके थे उसने कहा क्या आप मुझे सीखा सकते है साधू ने उसे अंदर भुलाया और अपने कमरे में ले गए आसमान में पूर्णिमा का चाँद चमक रहा था और सब और शांति का वातावरण था वो चाँद देख रहे हो कितना सुन्दर है वो पूरी परिक्रमा करेगा और कल सुबह सूरज एक बार फिर से चमक उठेगा मगर सूरज की रौशनी कई ज्यादा है और उसमे हमे अपने आस पास के पेड़, पहाड़, बादल सब नज़र आ जाते है

मैंने दोनों को पिछले कितने ही सालो से देखा है और कभी चाँद को नहीं कहते सुना की मै सूरज की तरह क्यों नहीं चमकता क्या मै उससे हीन हु बिलकुल नहीं उस आदमी ने जवाब दिया सूरज और चाँद दोनों अलग अलग है दोनों की अपनी खूबसूरती है तो तुम जवाब जानते हो हम दोनों एक दूसरे से अलग है दोनों अपने अपने तरीके से अपने विचारो के लिए लड़ रहे है और दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने की कोशिश कर रहे है बाकि सब केवल एक मुखोटे है।

(22) जिंदगी वही है जो आप इसमें डालते है ||||

एक पिता और बेटा पहाड़ो में सैर कर रहे थे तभी बेटा गिर पड़ा और उसको चोट लग गयी और वो जोर जोर से रोने लगा आ आ आ आ आ ;;; वो हैरानी हुई जब उसने अपने रोने की आवाज पहाड़ो से वापस आती सुनी आ आ आ आ आ ;;; उत्सुक होकर उसने चिल्ला कर पूछा कौन हो तुम जवाब आया कौन हो तुम जवाब सुनकर वो क्रोधित हो गया और चिल्लाया कायर तुरंत जवाब आया कायर उसने अपने पिता से पूछा ये क्या हो रहा है

पिता ने मुस्कुरा कर जवाब दिया मेरे बेटे ध्यान से सुनो और तब उसने पहाड़ो की और जोर से कहा मैं तुम्हारी सराहना करता हु आवाज आयी मैं तुम्हारी सराहना करता हु पिता फिर चिल्लाये तुम एक चैंपियन हो जवाब आया तुम एक चैंपियन हो लड़का हैरान था मगर कुछ समझ नहीं पा रहा था तब उसके पिता ने उससे कहा लोग इससे गूंज कहते है मगर असल में ये जिंदगी है वो तुम्हे वही सब देती है जो तुम कहते और करते हो हमारी जिंदगी हमारी करनी का आईना है अगर तुम दुनिया में और प्यार चाहते हो तो अपने दिल में और प्यार पैदा करो अगर अपनी टीम से अच्छा काम चाहते हो अपना काम बेहतर करो जिंदगी तुंम्हे वह सब देगी जो तुम उससे दोगे |

(21) मानसिक रोगी बच्चे||||

जब मै इंडिआना रीटाडीड बच्चो की संस्थान में भाषण देने गया तो मुझे एहसास हुआ की वहा पर आये ज्यादातर लोग या तो मानसिक रोगी बच्चो के माता पिता थे या उनके शिक्षक और वो बच्चो के साथ होते बर्ताव को लेकर बेहद सवेदनशील थे इसलिए मैंने उनसे कहा देवी और सज्जनो मिशिगन में हम हमारे विद्यालयों में मानसिक रोगी बच्चो को साधारण बच्चो के साथ एक ही कक्षा में मिलकर पढ़ाना शुरू कर रहे है और हॉल ही में हमने यह तरीका छठी कक्षा में लागू किया आधी छुट्टी का समय था और एक बचे ने दूसरे बच्चे से कहा आओ टेरेसा चले एलिज़ाबेथ की चिंता मत करो वो तो पागल है जब वो चले गए तब एलिज़ाबेथ जो मानसिक रोगी थी मगर बेहरी नहीं धीरे से उठ कर अपनी कक्षा तक गयी और टीचर से पूछा मिस ब्राउनिंग क्या मै पागल हु मिस ब्राउनिंग ने उसकी बात सुन कर एक मीठी सी मुस्कान दी और एलिज़ाबेथ का हाथ पकड़कर कहा है एलिज़ाबेथ तुम पागल हो एक पल ठहर कर उन्होंने कहा और एलिज़ाबेथ मै भी पागल हु हर कोई पागल है क्योकि भगवान ने किसी को भी बिलकुल ठीक नहीं बनाया है मगर एलिज़ाबेथ कोई भी उनसे ज्यादा पागल नहीं है जो ये बात समझ सकते है पर समझना नहीं चाहते|