(36) जुड़ते पुल ||||

एक बार दो भाई जो पास पास दो खेतो में रहते थे,में झगड़ा हो गया। पिछले 40 सालो से बिना किसी अनबन के पास पास खेती करते हुए, मशीने साझा करते हुए, मजदूर बांटते और प्यार से रहते हुए, ये पहली बार था की इतना झगड़ा हो गया था।

और सालो का रिस्ता बिखर गया। बात एक जरा सी गलतफहमी से शुरू हुई और इतनी बड़ी हो गयी की दोनों ने एक दूसरे को बहुत भला बुरा कहा और हफ्तों तक बात नहीं की।

एक दिन जॉन के दरवाजे पर एक दस्तक हुई। उसने दरवाजा खोला तो सामने बढ़ई का सामान लिए एक आदमी खड़ा था। उसने कहा ,मै कुछ दिनों के लिए काम ढूंढ रहा हु।

शायद आपके पास मेरे करने लायक कोई छोटा मोटा काम हो। क्या मै आपकी कोई मदद कर सकता हु।

हां बड़े भाई ने कहा। काम तो है तुम्हारे लिए। नाले के उस पार वो खेत देखो। वो मेरा पडोसी है, बल्कि मेरा छोटा भाई है। पिछले हफ्ते तक हम दोनों के बीच में एक चारागाह था पर इसने अपना बुलडोज़र लेकर नदी से यहाँ तक हम दोनों के बीच में ये नाला बना दिया। उसने ये मुझे चिढ़ाने के लिए किया होगा, मगर अब मैं इसे बताऊंगा। वह कोठर में पड़ी लकड़ी देख रहे हो। मैं चाहता हु तुम मुझे एक बाड़-8 इंच ऊँची बाड़ बना कर दे दो ताकि मुझे उसकी जगह देखनी ही नहीं पड़े। कुछ भी जिससे वो शांत हो जाये।

बढ़ई ने कहा, लगता है मैं माजरा समझ रहा हु। मुझे कीले और जगह बताये जहा बाड़ लगानी है। और मैं आपकी पसंद का काम कर के दे दूंगा।

बड़े भाई को कुछ सामान लेने के लिए बाजार जाना था। तो उसने बढ़ई को उसकी जरुरत का सामान दिया। और दिन भर के लिए निकल गया।

बढ़ई ने दिन भर मेहनत से नाप कर, लकड़ी चीर कर,कीले लगा कर काम किया।

श्याम ढले जब किसान वापस लौटा, तब बढ़ई ने बस अपना काम ख़त्म किया ही था। उसकी आंखें खुली की खुली रह गयी। और उसका मुँह खुला का खुला।

वहाँ कोई बाड़ नहीं थी। वँहा एक पुल था। ……नाले के इस पार से उस पार तक। काम बहुत सुन्दर था, हत्थे वगेरह के साथ। और उसका पडोसी, उसका छोटा भाई, उस पार से बाहे फैलाये उसके पास आ रहा था।

तुम भी कमाल के हो। इतना सब मेरे कहने सुनाने के बाद भी तुमने ये पुल बनवा दिया।

दोनों भाई पुल के दोनों किनारो से चल के पुल के बीच में मिले और एक दूसरे के हाथ थाम लिए। पलट कर देखा तो बढ़ई अपने कन्धो पर अपना सामान लेकर निकल रहा था। नहीं रुको। कुछ दिन और रुक जाओ। तुम्हारे लिए मेरे पास और काम है। बड़े भाई ने कहा।

मैं ख़ुशी से रुकना चाहता, बढ़ई ने कहा। मगर अभी मुझे और कई पुल बनाने है।

(35) असली शान्ति ||||

एक बार एक राजा था जिसने घोषित किया की जो कलाकार शान्ति का सबसे अच्छा चित्र बनाएगा उसे इनाम दिया जायेगा। कई कलाकारों ने कोशिश की। राजा ने सभी चित्र देखे मगर अंत में दो चित्र सबसे ज्यादा पसंद आये जिनमे से उन्हें एक चुनना था।

एक तस्वीर एक शांत सरोवर की थी उस सरोवर में आस पास के शांत पहाड़ो की झलक दिख रही थी ऊपर नीला आसमान और रुई से बादल थे जिसने भी यह चित्र देखा उसने माना की यह शांति की उचित तस्वीर है दूसरे चित्र में भी पहाड़ थे मगर वो कठोर और सूखे थे ऊपर नाराज आसमान था जिससे बारिश हो रही थी और बिजली चमक रही थी पहाड़ के पास से उफनता हुआ झरना बह रहा था यह कही से शांति का चित्र नहीं लग रहा था। मगर जब राजा ने गहराई से देखा तो झरने के पीछे चट्टानों के बीच से एक झाडी निकल रही थी उस झाडी में एक चिड़िया ने एक घोसला बना रखा था उस गुस्से में बहते पानी के बीच वो मादा चिड़िया अपने घोसले में बैठी हुई थी शान्ति से।

क्या लगता है आपको कौन से चित्र को इनाम मिलना चाहिए।

राजा ने दूसरा चित्र चुना। जाने है क्यों। क्योकि राजा ने समझाया शान्ति का मतलब ऐसी जगह नहीं है जहा शोर,मुश्किल और काम न हो। शान्ति का अर्थ है इन सबके बीच में रहते हुए भी मन में शान्ति होना।

यही है शान्ति का असली अर्थ।

(34) समय का महत्व ||||

सोचिये कोई बैंक है जो हर रोज सुबह आपके अकाउंट में 86,400 डाल देता हो।

पिछले दिन का कोई हिसाब नहीं रहता। जो बकाया रह जाता है वह हर श्याम चला जाता है।

आप क्या करेंगे।

सारा पैसा निकल लेंगे और क्या।

हम सबके पास ऐसा एक बैंक है उसे कहते है समय।

हर सुबह वह हमे 86,400 सेकंड देता है दिन भर में जो हम अच्छे काम में इस्तेमाल नहीं कर पाते वह उस समय को हर रात हटा देता है। कोई पल अगले दिन को नहीं जाता दिन का बचा हुआ समय ख़तम हो जाता है अगर आप अपने दिन भर के समय का सही इस्तेमाल नहीं कर सकते ,तो नुक्सान आपका है।

कोई वापस नहीं जा सकता। जिस दिन का हिसाब है वह उसी दिन का रहता है आपको आज में आज के समय के हिसाब से रहना चाहिए इसका सदुपयोग करे अपनी सेहत, ख़ुशी, और तरक्की के लिए।

वक़्त की सुईया दौड़ रही है। जो वक़्त है उसका सही इस्तेमाल करे।

एक साल की एहमियत क्या होती है।

ये उस छात्र से पूछो जिसका एक साल जाया हो चूका है।

एक महीने की एहमियत क्या होती है।

ये उन माँ बाप से पूछो जिनका बच्चा एक महीने पहले जन्मा गया हो

एक हफ्ते की एहमियत क्या होती है।

ये हफ्ते में एक बार आने वाले अखबार के सम्पादक से पूछो।

एक दिन की एहमियत क्या होती है।

ये दिहाड़ी मजदूर से पूछो जिसे एक बड़े परिवार का पेट भरना है।

एक घंटे की एहमियत क्या होती है।

ये उन प्यार करने वालो से पूछो जो मिलने का इंतज़ार करते है।

एक मिनट की एहमियत क्या होती है।

ये उस इंसान से पूछो जिसकी ट्रैन, बस, या प्लेन छूट गया हो।

एक पल की एहमियत क्या होती है।

ये उस व्यक्ति से पूछो जिसका एक्सीडेंट होते होते वह बच गया हो।

एक मिली सेकंड की एहमियत क्या होती है

ये उससे पूछो जिसने ओलिंपिक में चांदी का पदक जीता हो।

आपका हर समय बहुमूल्य है। इसे संजो कर ज्यादा रखे क्योकि आपके पास कोई है जो आपके साथ आपका वक़्त बाटने के काबिल है और याद रखिये समय किसी का इंतज़ार नहीं करता।

(33) अपनी चिंताओं को जाने दें ||||

एक मनोवैज्ञानिक कमरे में घूम कर वहा बैठे लोगो को अपनी चिंताओं पर काबू करने के बारे में सीखा रही थी। जब उसने पानी का एक गिलास उठाया तो लोगो ने सोचा की वह पूछेगी वही सवाल की गिलास आधा भरा हुआ है या खाली है। मगर चेहरे पर एक मुस्कान के साथ उसने पूछा ये पानी का गिलास कितना भारी है।

जवाब आये 8 ग्राम से 20 ग्राम के बीच में।

उसने जवाब दिया की इसका वजन मायने नहीं रखता। फर्क इससे पड़ता है की मै इसे कितनी देर पकड़ी रहती हु अगर मुझे इसे एक मिनट पकड़ना है तो कोई मुश्किल नहीं है अगर मुझे इसे एक घंटा पकड़ कर रखना पड़े तो मेरा हाथ दुखने लगेगा। अगर मैं इसे एक दिन पकड़ कर रखू तो मेरा हाथ सुन्न पड़ जायेगा और पंगु हो जायेगा। हर हालात में गिलास के वजन में कोई फर्क नहीं आया। मगर जितनी देर मैंने इसको पकड़ कर रखा ,उतना ये भारी होता गया।

उसने आगे कहा जिंदगी में आने वाली चिंताए और दुःख भी इस पानी के गिलास की तरह है इनके बारे में थोड़ी देर सोचिये और कुछ नहीं होगा। इनके बारे में कुछ ज्यादा देर सोचिये तो ये दर्द पहुंचाने लगेंगे और अगर आप इनके बारे में पूरा दिन सोचेंगे। तो ये आपको पंगु बना देंगे फिर आप कुछ करने के काबिल नहीं रहेंगे।

जरुरी है यह याद रखना की आपको अपनी चिंताओं को जाने देना है श्याम को जितना जल्दी हो सके अपनी सभी चिंताओं को नीचे रख दे। उन्हें श्याम से रात में न ले जाये गिलास को नीचे रखना याद रखिये। खुश रहिये मुस्कुराते रहिये। धन्यवाद

(32) ईमानदारी ||||

एक बार एक दूर पूर्व में एक राजा होता था जो बूढ़ा हो रहा था वह जानता था की अब उसे अपना उत्तराधिकारी चुन लेना चाहिए अपने बच्चो या मंत्रियो में से किसी को चुनने की बजाए उसने कुछ अलग करने का निर्णय किया।

उसने प्रजा के हर नौजवान को एक साथ बुलाया। उसने कहा समय आ गया है की मै सिंघासन से उतर जाऊ और अगला राजा बनाऊ। मैंने तुम्हारे बीच से चुनाव करने का फैसला किया है बच्चे स्तब्ध रह गए मगर राजा ने आगे कहा मैं तुम सबको आज एक एक बीज दूंगा केवल एक बीज। ये बहुत ख़ास बीज है मैं चाहता हु की आप ये बीज लेकर घर जाये इसे उगाये ,पानी दे और साल भर बाद इस बीज का क्या रूप है मेरे पास लेकर के आये। आपके लाये पौधे मैं आंकूंगा और जिससे मैं चुनुँगा उससे देश का अगला राजा घोषित कर दिया जायेगा।

उस दिन वहा एक लिंग नाम का लड़का था जिसे भी ओरो की तरह एक बीज मिला। उत्साहित वह घर पहुंचा और अपनी माँ को सारी कहानी कह सुनाई। माँ ने गमला और मिटटी लाने में उसकी मदद की जिसमे उसने बीज को लगाया और उसे पानी दिया। हर रोज वह उसे पानी देता और उसके बढ़ने का इंतज़ार करता।

तीन हफ्ते बाद कुछ अन्य युवक अपने बीज और उसके उगने के बारे में बात करने लगे। लिंग घर जा कर अपना बीज देखता है मगर वहा कुछ नहीं था तीन ,चार ,पांच हफ्ते बीत गए मगर कुछ नहीं।

अब तक सब अपने अपने पौधे के बारे में बात कर रहे थे मगर लिंग के पास उस गमले में कुछ नहीं था उसे यकीन हो गया की उसने अपने बीज को मार डाला है। बाकि सब के पास पेड़ ,ऊँचे पौधे थे मगर उसके पास कुछ भी नहीं।

मगर उसने अपने दोस्तों से कुछ नहीं कहा।

वो केवल अपने बीज के उगने का इंतज़ार करता रहा।

साल बिता और प्रदेश के सारे नौजवान अपने अपने पौधे लेकर राजा के पास पहुंचे। लिंग ने अपनी माँ से कहा की वह खाली गमला लेकर नहीं जायेगा। मगर उन्होंने उसे अपना गमला लेकर जाने के लिए और ईमानदारी से सच बोलने के लिए प्रोत्साहित किया। लिंग को यह बिलकुल अच्छा नहीं लग रहा था मगर वह जनता था माँ सही कह रही है वो अपना खाली गमला लेकर महल पहुंचा।

जब लिंग वहा पहुंचा तो वह नौजवानो के अलग अलग पौधे देख कर हैरान रह गया। वे सारे ही बेहद खूबसूरत और भिन्न भिन्न ऊंचाई और प्रकार के थे। लिंग ने अपना खाली गमला जमीन पर रखा जिसे देख कर बाकि बच्चे हंस पड़े। कुछ ने उसके साथ सहानभूति जताई और कहा अच्छी कोशिश थी दोस्त।

राजा जब कमरे में आये तो सभी नौजवानो का अभिनन्दन किया और कमरे का जायजा लिया। लिंग पीछे छुपने की कोशिश करता रहा। राजा ने पौधे देख कर कहा। मेरे भगवान। क्या बेहतरीन पौधे , पेड़ और फूल है।

अचानक कमरे के बीच खाली गमला लिए खड़े लिंग पर राजा की नज़र पड़ी। उन्होंने अपने सैनिको से उसे सामने लाने को कहा। लिंग घबरा गया। राजा को पता चल गया की मैं एक नाकामयाब युवक हु। शायद अब मुझे मरवा देंगे।

लिंग जब सामने आया तो राजा ने उससे उसका नाम पूछा। उसने बताया जी मेरा नाम लिंग है। सारे बच्चे हंस रहे थे और उसका मजाक बना रहे थे। राजा ने सबको शांत हो जाये का आदेश दिया। उसने लिंग की और देखा और घोषणा की।

अपने नए राजा का सत्कार करे। उसका नाम लिंग है लिंग को यकीन नहीं हुआ। वह अपना बीज भी नहीं उगा पाया था वह राजा कैसे बन सकता था।

तब राजा ने कहा सालभर पहले मैंने सबको एक एक बीज दिया था मैंने कहा था की इसे घर ले जाये,उगाये ,पानी दे और आज वापस मेरे पास लेकर आये। मगर मैंने आप सब को उबले हुए बीज दिए थे जो उग ही नहीं सकते थे। आप सब, सिवाए लिंग के मेरे पास पेड़ ,पौधे ,फूल लेकर आये है। जब आपने देखा की बीज नहीं उग रहा है आपने उसे दूसरे बीज से बदल दिया। सिर्फ लिंग में वो बहादुरी और ईमानदारी थी की वह गमले में वही बीज लेकर आया। इसलिए ये ही है वह जो नया राजा बनाया जायेगा।

(31) तक़लीफो का सामना सकारात्मक तरीके से करे ||||

ये कहानी एक किसान की है जिसके पास एक बूढ़ा खच्चर था वो खच्चर एक दिन किसान के कुए में गिर गया किसान ने खच्चर को भगवान् को याद करते सुना या वो जो भी खच्चर करते है जब वो कुए में गिर जाते है माजरा समझने के बाद किसान को खच्चर के लिए दुःख हुआ मगर उसने तय किया की ना ही वो खच्चर और ना ही वो कुआ बचाये जाने के लायक है। उसने अपने पड़ोसियों को बुलाया और बताया की क्या हो गया और उनसे मदद मांगी की वे कुए में मिटटी डाल कर खच्चर को वही दफना दे और उसे उसकी पीड़ा से मुक्ति दे।

पहले तो खच्चर ये सुन कर पागल हो गया मगर जैसे जैंसे किसान और उसके पडोसी मिटटी डालते गए और वो उसकी पीठ पर पड़ती गयी उससे एक तरकीब सूझी की हर बार जब मिटटी उसके ऊपर पड़ती है तो वह उसे झाड़ कर उसके ऊपर चढ़ सकता है और वह ये करता गया झाड़ो और चढ़ो,,,,,झाड़ो और चढ़ो ,,,,,झाड़ो और चढ़ो। वह खुद को प्रोत्साहित रखने के बोलता गया जितना भी दर्द होता जितनी भी परस्थिति ख़राब होती लगती वो बूढ़ा खच्चर अपने डर से लड़ता बस ये सोच कर बढ़ता गया झाड़ो और चढ़ो।

कुछ ही समय में बूढ़ा खच्चर घायल और थका हुआ कुए की दिवार को जीत कर लांग गया जो लगता था की उसे दफना देगा वही उसे बाहर ले आया सिर्फ उसकी समस्या के जूझने के तरीके की वजह से।

यही जिंदगी है हमें अपनी तक़लीफो का सामना करना चाहिए और उनका सकारात्मकता से हल निकलना चाहिए और डर, कड़वाहट और अफ़सोस को जगह नहीं देनी चाहिए।

(30) ये समय भी निकल जायेगा||||

एक अमीर बुढा मरने वाला था डाक्टर कह चुके थे की वह छ महीने से ज्यादा जिंदा नहीं रहेगा अब इस बूढ़े आदमी के तीन बेटे थे उसने उन्हें अपने पास बुलाया और उन तीनो के बीच अपनी जायदाद बराबर बराबर बाट दी मगर अपने सबसे छोटे बेटे को उसने एक छोटी अंगूठी और भेट की। उसने कहा क्योकि तुम मेरे सब से छोटे बेटे हो और तुम औरो जितना तुजर्बा नहीं है में तुम ये अंगूठी देता हु जब बी कोई परेशानी हो कोई कठिन परिस्थिती हो इस अंगूठी को इस्तेमाल करना उसे पहले नहीं और आखरी में इस अंगूठी का किसी से ना करना सबसे छोटे बेटे ने अंगूठी लि अपनी ऊगली में पहनी और धिरे धिरे उसके बारे में बिलकुल बुल गयी तीनो बेटो ने अपना अपना व्यापार लगाया सबसे छोटे ने जहाज का बिजनस शरू किया एक बार एक ही दिन में उसके दो जहाज डूब गए नतीजतन एक ही झटके उसकी साडी दौलत चली गई और वो सड़क पर आ गया उसे अपना घर बचना पड़ा और उसके दरवाजे के बाहर लेनदारों की कतार के चलते वो सोचने लगा की इस परेशानी को कैसे निकले तभी उसे अपने पिता की सलाह याद आई उसने अपनी अंगूठी निकली उसे देखा उसने देखा की पत्थर के निचे कुछ लिखा हुआ था वो तुरंत पत्थर को पॉलिश करने में लग गया ताकि वो पढ़ सके वह क्या लिखा है बहुत पॉलिश करने के बाद उसने लगा क़ि इतना बारीक़ वो अपनी आखो से नहीं पड़ पायेगा वो एक आवर्धिक लेस ले कर आया और जोर देकर शब्द पड़ने लगा जो उसने पड़ा उससे उसकी जिंन्दगी हमेशा के लिए बदलने वाली थी वहा लिखा था मेरे बेटे तसल्ली रखो ये समय भी बीत जायेगा इसे छोटे से वाक्य ने जिन्दगी बदल दी।

(29) क्षमा करो और भूल जाओ||||

एक बूढ़े आदमी की अपने इकलौते बेटे से बहस हो गयी उसने बहुत बार माफ़ी मांगी मगर उस नौजवान ने उसकी एक ना सुनी। पिता ने हार नहीं मानी क्योकि वो अपने बेटे से बेहद प्यार करते थे मगर बेटे ने उन्हे माफ़ नहीं किया क्योकि वो अपने घमंड में चूर था

सालो गुजर गए और जब वो बूढ़ा आदमी अपनी मौत के नजदीक था उसने अपने बेटे से रिश्ता बनाने की आखरी कोशिश की मगर बेटा नहीं माना और बूढ़ा आदमी अपने दिल में अपार दर्द लिए सिधार गया

इस दौरान बेटे का भी एक बेटा हो गया था जो अब एक नवयुवक बन चूका था उसने अपने बेटे को कभी अपने पिता के बारे में नहीं बताया था जब भी वो अपने दादा के बारे में पूछता उसे इस बारे में बात करने से मना कर देता।

एक दिन उन दोनों में बहुत बहस छिड़ जाती है और उसका बेटा भी घर छोड़कर चला जाता है जैसे कई सालो पहले वो चला गया था वो बहुत दुखी हो जाता है इस बार उसमे कोई घमंड नहीं था मगर वो खुद को बहुत अकेला महसूस करता है

उसे लगा कि उसने अपने बेटे को हमेशा के लिए खो दिया है और जिन्दगी में पहली बार भगवान से प्रार्थना की और रुख किया तभी उसे एहसास हुआ कि इतने सालो पहले उसके पिता को कैसा महसूस हुआ होगा उसे याद आया कि कैसे उसने अपने पिता को दुःख पहुंचाया था और उसे एहसास हुआ की उसने उन्हें कितना बड़ा दुःख दिया था जितना वो सोचता गया उसे समझ आता गया की उसने अपने पिता के साथ कितना गलत किया था उस आदमी के साथ जिसने उसे सारी जिन्दगी सब कुछ दिया

इन दुखद ख्यालो के साथ वो सोफे पर ही सो गया अगले दिन सुबह जब उसकी नींद खुली तो उसने देखा वह आराम से अपने पलंग पर सो रहा है और उसका बेटा उसके सामने खड़ा है उसे अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था बाप बेटा दोनों गले लग कर बहुत रोये

एक दूसरे से अनेक माफिया मांगने के बाद बेटे ने कहा की अभी तक वह अपने पिता से बहुत नफरत करता था मगर रात को उसे एक अजीब सपना आया जो उसके दिल को छू गया उसने सपने में देखा की एक बूढ़ा आदमी उसे गले लगा रहा है।

और जब उसे उस आदमी को गले लगाया तो उसकी सारी नफरत प्यार में बदल गयी उस बड़े आदमी ने तब उसे सलाह दी की वो क्षमा करे और भूल जाये

उसने बताया की जैसे ही वह सुबह उठा वह दौड़ता हुआ अपने पिता के घर आ गया तब उस आदमी ने अपने बेटे को बताया कि उसी रात उसने भी जरूरी सबक सीखा कैसे उसने अपने पिता को दुख पहुंचाया था जब वह जवान था उसका बेटा अपने दादा के बारे में जानना चाहता था जिनसे वो कभी मिला नहीं था देखा नहीं था और अब यह सबसे सही वक्त था आदमी जा कर अपने पिता कि तस्वीरों वाली एल्बम ले आया बेटे ने जब तस्वीरें देखी तो वो भौंचक्का गया उसने बताया की तस्वीर वाला आदमी वही है जो कल रात उसके सपने में आया था।

(28) जिम्मेदारियाँ ||||

एक बार जो ई ब्राउन नामी अभिनेता व हास्य अभिनेता सैनिको के एक बड़े ग्रुप को सम्बोधित कर रहे थे जब भी वह ख़तम करना चाहते सैनिक शोर मचा कर उन्हें कार्यक्रम बढ़ाने को कहते। फिर एक ने कहा जो गन्दी कहानिया सुनाओ सन्नाटा इतना गहरा छाया की सुई गिरने की आवाज भी सुनाई दे जाती। सब लड़के जो को देख रहे थे जो एक मिनट रुके और फिर ये भूल कर की वह यह लोगो का मनोरंजन करने के लिए है उसने अपने बेटो के तरह बोले।

सुनो बच्चो मै दस साल का था जब से स्टेज पर हु मैंने हर तरह के लोगो को हर तरह के जोक सुनाये है मगर मुझे गर्व है की इस पुरे समय में मुझे लोगो को हँसाने के लिए कभी गंदे जोक नहीं सुनाने पड़े मुझे भी कुछ गन्दी कहानिया पता है बच्चो मैंने अपनी जिंदगी में ऐसी बहुत सी कहानिया सुनी है मगर मैंने शुरू से ही एक नियम बना रखा है की मै ऐसी कोई कहानी नहीं सुनाऊंगा जो मै नहीं चाहता की मेरी माँ मुझे सुनाते हुए सुने।

उनका ये वाक्य ख़तम होने पर तालियों की इतनी बड़ी गड़गड़ाहट गुंजी जैसी उन्होंने पहले कभी नहीं सुनी थी कई मिनटों तक वे लोग चिल्लाते रहे और तालिया बजाते रहे इनमे वह लड़का भी था जिसने गन्दी गालिया सुनाने की फरमाईश की थी मगर किस्सा यही ख़तम नहीं हुआ लड़को ने यह बात अपने घर लिख कर अपने अभिभावकों को बताई और उन्होंने अपना शुक्रिया अदा करते हुए जो को लिखा, अपने जो मेरे बेटे के लिए किया उसके लिए मै हर रात प्रार्थना करुँगी।

(27) बेहतर आत्मविश्वास ||||

क्या आप नकारात्मक सलाहों से जल्दी से डर जाने वालो में से है बेहतर आत्मविश्वास के इस छोटे से सबक का अनुसरण करे। हेनरी वार्ड बिचर जब स्कूल में पड़ता था उसने आत्मविश्वास का ऐसा सबक सीखा जो वह कभी नहीं भुला उसे पूरी कक्षा के सामने कवितापाठ के लिए भुलाया गया उसने शुरू ही किया था जब उसकी टीचर ने उसे टोका और चीड़ कर कहा, नहीं , उसने दुबारा से शुरू किया मगर टीचर फिर से कहा , नहीं , शर्मा कर हेनरी बैठ गया अगला लड़का उठा और शुरू हुआ ही था जब टीचर चिल्लाई ,नहीं ,मगर ये लड़का रुका नहीं जब तक की उसने पूरी कवितापाठ ख़तम नहीं कर लिया जब वह बैठा टीचर ने कहा बहुत बढ़िया। हेनरी चीड़ गया उसने शिकायत लहजे में कहा , मैंने भी तो ऐसे ही किया था मगर उन्होंने जवाब दिया सिर्फ सबक जानना ही जरुरी नहीं है उसके बारे में पक्का होना भी जरुरी है जब तुमने मुझे तुम्हे रोकने दिया इसका मतलब था की बहुत पक्के नहीं हो अगर दुनिया कहती है नहीं तो ये तुम्हारा कहो हां। और उसे साबित करो।

हेनरी वार्ड बिचर 19वी सदी के एक जानी मानी धार्मिक सभा के पादरी ,समाज सुधारक , उन्मूलनवादी और प्रवक्ता थे

दुनिया हजार बार कहेगी ,नहीं।

नहीं,तुम ऐसा नहीं कर सकते।

नहीं , तुम गलत हो।

नहीं , तुम बहुत बड़े हो गए हो।

नहीं , तुम बहुत छोटे हो।

नहीं, तुम बहुत कमजोर हो।

नहीं , ये नहीं हो पायेगा।

नहीं , तुम इसके लिए पढ़े लिखे नहीं हो।

नहीं, इसके लिए तुम्हे कुछ पता नहीं है।

नहीं , तुम्हारे पास पैसे नहीं है।

नहीं, ये नहीं हो सकता।

और हर नहीं, जो आप सुनते है वो आपका आत्मविश्वास थोड़ा थोड़ा करके जंग लगा देता है जब तक की आप हार नहीं मान लेते। हालाँकि आज भी दुनिया कहेगी नहीं , मगर आपमें आत्मविश्वास होना चाहिए कहने का हां , और उससे साबित करे।

%d bloggers like this: